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होममाइलस्टोनराष्ट्रीय क्षमता निर्माण

राष्ट्रीय संघटक के अंतर्गत प्रभावी तट प्रबंधन के लिए पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, राज्य सरकारों, संस्थाओं, संगठनों और जनता को सहायता देने के लिए एक विश्व स्तरीय ‘राष्ट्रीय स्थाई तटीय प्रबंधन केंद्र’की स्थापना की गई है।

एनसीएससीएम की प्रमुख वैज्ञानिक उपलब्धियां (2012 –अपैल 2018)

एनसीएससीएम द्वारा देश में पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर निम्नलिखित प्रमुख अध्ययन पूर्ण किए गए हैं जिनका नीति और निर्णय के संबंध में प्रत्यक्ष प्रासंगिकता और निहितार्थ रहा है।

तटीय और समुद्री संसाधन संरक्षण

Marine Resource Conservation
  • पारिस्थितिक रूप से संवेदी क्षेत्रों के साथ साथ भारत के मुख्य भूमि तट और द्वीपीय तटों के मैपिंग का कार्य पूर्ण हो चुका है।
  • अति संवेदनशील तटीय क्षेत्रों का सीमांकनका कार्यलिया गया है, जो पारिस्थितिक रूप से संवेदी क्षेत्रों पर सामुदायिक निर्भरता की प्रमात्रा का वैज्ञानिक आकलन करने के लिए एक विशिष्ट फ्रेमवर्क है, इसमे देश के तटों के साथ 12 सीवीसीए स्थलों के सीमांकन का कार्य शामिल है।
  • लगभग 10,000 प्रजातियों के लिए तटीय और मरीन जैव विविधता एकीकरण नेटवर्क डाटाबेस तैयार कर लिया गया है और यह आनलाइन उपलब्ध है।
  • मैनग्रोव, कोरल रीफ, कछुआ रेस्टिंग स्थलों आदि के लिए तटीय और मरीन इकोसिस्टम वस्तुओं और सेवाओं के मूल्यांकन का अनुमान लगाया जा चुका है।

तटीय विनियमन क्षेत्र

Coastal Regulation Zone
  • नदी के मुहानों के साथ ही तटों के लिए हाई टाइड लाइन (एचटीएल) का सीमांकन कार्य पूर्ण हो चुका है।
  • अगले 100 वर्षो में अपरदन के पूर्वानुमान के साथ हाई रेजोल्यूसन अपरदन की मैपिंग (1:10,000 स्केल) का कार्य पूर्ण हो चुका है।
  • एनसीएससीएम के अपरदन मैप के आधार पर सर्वे आफ इंडिया के साथ तटों के लिए जोखिम रेखा के सीमांकन का कार्य पूर्ण कर लिया गया है और एसओआई द्वारा बाढ़ रेखा तैयार कर दी गई है।
  • सीआरजेड 2011 की अधिसूचना की अपेक्षानुसार एनसीएससीएम द्वारा गोवा, कर्नाटक, तमिलनाडु, दमन और दीव, गुजरात, आंध्र प्रदेश, के लिए तटीय अंचल प्रबंधन योजना तैयार की जा रही है।
  • लक्षद्वीप के 10 आबाद द्वीपों और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 4 द्वीपों के लिए एकीकृत द्वीप प्रबंधन योजना तैयार कर ली गई है।
  • मछुआरों के गांवों के लिए सूक्ष्म स्तरीय विकेंद्रीकृत योजना के लिए दिशानिर्देश तैयार कर लिए गए हैं।

शोरलाइन प्रबंधन

Shoreline Management
  • तटीय अवसादी सेल जो देश के तटरेखा प्रबंधन के लिए मूल इनपुट है, के चित्रांकन का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। प्रमुख क्षेत्र जहां तटरेखा प्रबंधन योजना कार्यान्वित किए जाने की आवश्यकता है, का निर्धारण किया जा चुका है।

क्षमता

  • गोवा के समुद्र तटों की क्षमता का आकलन पूर्ण हो चुका है।
  • लक्षद्वीप के आबाद और खाली द्वीपों के लिए पर्यटन क्षमता तैयार की जा चुकी है।

जलवायु में परिवर्तन को कम करना तथा अनुकूलन

  • मुख्य भूमि तट और द्वीप समूहों के लिए अपतटीय पवन ऊर्जा क्षमता पूर्ण कर ली गई है।
  • भारत में तटीय इको सिस्टम से कार्बन पृथक्करण तथा ग्रीन हाऊस गैस उत्सर्जन का मापन।
  • समुद्री अम्लीकरण तथा अल-नीनों प्रभाव के लिए रीयल टाइम कोरल रीफ मानिटरिंग।

प्रदूषण की निगरानी

  • मरीन कुड़ा करकट तथा समुद्र तट स्वच्छता कार्यक्रम कार्य शुरू किया गया है।
  • प्रतिरक्षण प्रयासों के लिए तटीय इको सिस्टम के स्वास्थ्य का अध्ययन किया गया है।
  • संचयी पर्यावरण प्रभावों का मूल्यांकन करने के लिए भारत के तटों/खाड़ियों/क्रीकों के साथ साथ मुख्य प्रदूषण हॉटस्पॉट की निगरानी की जा रही है।

एकीकृत तटीय अंचल प्रबंधन (आईसीजेडएम)

  • आईसीजेडएम योजना तैयार करने के लिए दिशानिर्देश तैयार किए जा रहे हैं।

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