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जामनगर में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के बारे में एक केस स्टडी

Coastal Pollution Abatement
Coastal Pollution Abatement

पृष्ठभूमि

भारत सरकार ने भारत में तटीय अंचलों के पर्यावरण की सुरक्षा के लिए एक कार्यनीति तैयार करने में सहायता के लिए विश्व बैंक से संपर्क किया था और तदुपरांत भारत सरकार ने ‘एकीकृत तटीय अंचल प्रबंधन परियोजना (आईसीजेडएमपी)’की परिकल्पना की तथा प्रायोगिक निवेश के तौर पर इन परियोजनाओं को आरंभ मे गुजरात, ओडिशा और पश्चिम बंगाल राज्यों में शुरू किया गया। आईसीजेडएमपी तटीय संसाधनों/मरीन जैव विविधता के संरक्षण के लिए उच्चतम न्यायालय द्वारा वर्ष 2005 में समर्थित स्थाई विकास और तटीय क्षेत्र संरक्षण के अधिदेश का परिणाम था। इस परियोजना को जामनगर नगर परिषद द्वारा कार्यान्वित किया गया है और इसके लिए आईसीजेडएम गुजरात अर्थात गुजरात इकोलोजी आयोग (जीईसी) के एसपीएमयू से तकनीकी सहायता प्राप्त की गइ्र है।

लक्ष्य

तटीय और मरीन जैव विविधता के संरक्षण के लिए जामनगर नगर निगम (जामनगर शहर सहित जामनगर शहरी विकास प्राधिकरण) के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र के लिए भूमिगत सीवरेज सिस्टम का विकास करना।

उद्देश्य

  • तटीय और मरीन पर्यावरण पर अशोधित मलजल निस्तारण के प्रभाव को कम से कम करने के लिए जामनगर में प्रभावी भूमिगत सीवरेज सिस्टम की स्थापना करना और इस प्रकार मूंगा और मैनग्रोव जैसे तटीय जैव विविधताओं के संरक्षण की दिशा में आगे बढ़ना।
  • 70 एमएलडी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना करना।

लाभ

  • सीवेज का बेहतर प्रबंध होने से मरीन जीवन का संरक्षण।
  • मरीन प्रजातियों, समुद्री घास और मूंगे जो अशोधित सीवेज को समुद्र में डंप करने से लंबे समय से विलुप्त हो गए थे, को पुन: जीवन प्रदान करना।
  • मरीन जैव विविधता का बेहतर प्रबंधन और संरक्षण करना।
  • भूजल और पाइपलाइन के जरिए पहुंचाए जा रहे जल में दूषण के अवसर को कम करना जिससे बीमारियों की घटनाओं में कमी आएगी और स्वास्थ्य की स्थिति में सुधार होगा।
  • सिंचाई के लिए शोधित जल और सुखी गाद का खाद के रूप में उपयोग से किसानों को आर्थिक लाभ।
  • सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट पर स्थाई रोजगार का सृजन होगा।

परियोजना पर एक नजर

The Project at a Glance
आरंभ होने की तिथि जून 2010 समाप्त होने की तिथि जून 2016
लागत 88 करोड़ रूपए वित्तपोषण करने वाली एजेंसी विश्व बैंक

कार्यान्वयन एजेंसियां

12 अप्रैल, 2010 को एकीकृत तटीय अंचल प्रबंधन परियोजना के अंतर्गत जामनगर नगर निगम और एसपीएमयू-जीईसी के बीच औपचारिक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए और जेएमसी को आईसीजेडएमपी के अंतर्गत परियोजना का कार्र्यान्वयन करने तथा प्रबंध करने के लिए कार्यकारी एजेंसी के रूप में चुना गया। जामनगर शहर के सीवरेज घटकों का कार्यान्वयन करने के लिए जीईसी एसपीएमयू-जेएमसी ने परियोजना प्रबंध परामर्शदाता के रूप में माट मैकडोनाल्ड प्रा. लिमि. को नियुक्त किया था।

70 एमएलडी क्षमता का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) – डिजाइन; बनाओ; चलाओ और स्थानांतरण करो (डीबीओटी)

अपनी कार्यवाहियों के भाग के रूप में समिति ने यह निष्कर्ष निकाला और सिफारिश की थी कि मैसर्स एस्सार प्रोजेक्ट (इंडिया) लिमिटेड/थर्माक्स लिमिटेड-जेवी द्वारा प्रस्तुत बोली सबसे कम मूल्य वाली थी और पर्याप्त रूप से उत्साहजनक बोली थी जिसका मूल्य 78 करोड़ रूपए था। इसमे आरंभिक 2 वर्षों के लिए प्रचालन और रखरखाव शामिल था तथा 13 वर्षो के प्रचालन और प्रबंधन के उपरांत प्रचालक बोली मानक के भाग के रूप में शोधित जल की बिक्री के माध्यम से जेएमसी को प्रीमियम के रूप में 2 करोड़ रूपए अदा करेगा।

प्रोसेस तकनीकी और उपचार मेथड एस्सार-जाइलम द्वारा अपनाए गए जिसने गंदे पानी के सेकेंडरी उपचार का एसबीआर-आईसीईएएस मेथड का प्रस्ताव किया था।

प्रोसेस ट्रीटमेंट स्कीम

Process Treatment Scheme

प्लांट का निर्माण करने के साथ साथ इसका ट्रायल रन, टेस्टिंगऔर चालू करने का कार्य प्रचालक द्वारा 31 अगस्त, 2016 को सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया। ट्रायल रन, टेस्टिंग और आरंभिक अवधि के दौरान सभी यूनिटों के लिए लाइव लोड टेस्ट का परीक्षण किया गया, और संस्थापित सभी इलैक्ट्रो-मकैनिकल और इंस्ट्रुमेंटल यूनिट के लिए प्रचालन से संबंधित सभी छोटे मुद्दों को समझा गया, और इस प्लांट के कार्य निष्पादन और चालू होने के दौरान आवश्यकता के आधार पर सभी प्रकार के उपकरणो की सर्विसिंग और केलिब्रेशन किया गया। लैब केमिस्ट और प्लांट मैनेजर की नियुक्ति के साथ इस अवधि में प्रयोगशाला की स्थापना की गई और पानी की गुणवत्ता मानक (बोली अपेक्षा के अनुसार) की जांच करने के लिए अपेक्षित सभी प्रकार के उपकरणों को प्रयोगशाला में उपयोग हेतु केलिब्रेशन के उपरांत स्थापित किया गया।

स्वास्थ्य लाभ

आंकडे बताते हैं कि मलेरिया, डेंगु, चिकुनगुनिया के साथ साथ डायरिया/उल्टी, कालरा, पीलिया और टाइफाइड के मामलों में 2011 से 2016 की अवधि के दौरान स्पष्ट कमी आई है।

सीखे गए अनुभव

यह सौराष्ट्र के तटवर्ती क्षेत्र में पहली एकीकृत सीवेज अवसंरचना परियोजना थी। परियोजना का कार्यान्वयन करने वाले लोगो के लिए परियोजना का कार्यान्वयन करना नि:संदेह एक बड़ी चुनौती थी। परियोजना के कार्यान्वयन के दौरान विभिन्न मुद्दे/समस्यायें सामने आए जो विशेष रूप से फील्ड कंडीशन, समय के अनुसार ठेकेदारों का कार्य निष्पादन न किया जाना और अन्य सरकारी विभागों से अनुमोदन प्राप्त करने में विलंब आदि से संबंधित थे और इनका समाधान कर लिया गया। इन मुद्दों को उचित तरीके से संभाला गया किंतु इसमें अतिरिक्त समय लगा। इन मामलों को सीखे गए अनुभव के रूप में सारांकित किया जा सकता है ताकि जेएमसी के साथ साथ अन्य समान प्राधिकरणों द्वारा कहीं और इसी प्रकार की परियोजनाओं को कार्यान्वित करने के दौरान भविष्य में अतिरिक्त समय और लागत से बचा जा सके।

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