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होममाइलस्टोनतटीय समुदाय की आजीविका सुरक्षासागर ब्लॉक में आजीविका विकास
Livelihood Development
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दक्षिण के 24 परगना जिले के सागर ब्लाकमें सागर द्वीप और घोरामारा द्वीप शामिल हैं। सागर ब्लाक मृदा अपरदन, तटबंधों के टूटने और भूमि खंडों के समाप्त होने तथा समुद्र स्तर के बढ़ने की समस्या का सामना कर रहा है। सागर ब्लाक सुंदरवन कीलगभग समुची आजीविका विस्तार का प्रतिनिधित्व करता है और इस परिदृश्य में आईसीजेडएमपी के अंतर्गत सागर ब्लाक मे तटीय समुदायों के लिए आजीविका उपाय के प्रयास किए गए हैं। आजीविका विकास संघटक का मुख्य उद्देश्य तटीय जनसंख्या का कमजोर व हाशिए पर रहने वाले गरीबों की जीवन गुणवत्ता और आजीविका में सुधार करने के लिए समुदाय आधारित जलवायु से अपरिवर्तित रहने वाली आजीविका को बढ़ावा देने के साथ साथ तटीय और मरीन पारि-प्रणाली (इकोसिस्टम) को संरक्षित करना है।

सागर ब्लाक के निवासियों में लाभ से वंचित रहने वाले वर्गों के लिए आजीविका विकास कार्यक्रम का कार्यान्वयन एसपीएमयू और पश्चिम बंगाल राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा किया जा रहा है।

एसपीएमयू ने सूक्ष्म तटीय अवसंरचना के सृजन के लिए इंट्री प्वाइंट कार्यकलाप के भाग के रूप में एसएचजी के माध्यम से स्वयं ही 128 समुदाय संविदाएं कार्यान्वित की हैं। इंट्री प्वाइंट कार्यकलापों के माध्यम से पूर्ण किए गए प्रमुख कार्यों में ईंट से बनी 19 किमी. सड़क, 78 ट्यूब वेल की सिंकिंग, 4 कलवर्ट का निर्माण, एक शौचालय ब्लाक का निर्माण और 7 तालाबों की खुदाई करना शामिल है। यह उल्लेख करना उचित होगा कि इस प्रकार के विकास कार्य सामान्यतया संबंधित विभागों द्वारा कार्यान्वित किए जाते हैं। तथापि, आईसीजेडएमपी के मामले में प्रायोगिक प्रयास परामर्श प्रक्रिया के माध्यम से एसएचजी के मोबलाइजेशन के जरिए किए गए। परिसंपत्तियों का सृजन पीआरए टूल के परिनियोजन और सामुदायिक स्तर पर विभिन्न स्टैकधारकों के साथ गहन परामर्श करके किया गया।

इंट्री प्वाईंट कार्यकलाप का कार्यान्वयन करने से न केवल पेयजल सुविधाओं में वृद्धि हुई अपितु इससे द्वीप के मुख्य सड़को से संपर्क में भी सुधार हुआ। यह लेखांकन, प्राक्कलन, तैयारी, सामग्री का प्रापण, सामुदायिक संविदा और वित्तीय और वास्तविक दोनों संदर्भों में सृजित आस्तियों के आडिट के संदर्भ में तटीय समुदायों के बारे में ज्ञान बढ़ाने की एक कार्रवाई के रूप में भी साबित हुआ है। इंट्री प्वाईंट कार्यकलापों ने समुदाय आधारित एकता की प्रक्रिया को सरल बनाया है और सामुदायिक परिसंपत्तियों के स्वामित्व का भाव भी जागृत करता है। हस्तेक्षेप के प्रयासों ने यह सिद्ध किया है कि दूरदराज के खाड़ी क्षेत्रों संसाधनों का उपभोग करने के लिए वंचित स्थिति में होने के बावजूद यदि समुदायों को शिक्षित किया जाए तो भूमि, श्रम और अन्य संबद्ध सामग्री के संदर्भ में योगदान देकर परिसंपत्ति के सृजन में अपना योगदान दे सकते हैं।

डब्ल्यूबीएसआरएलएम जो इस परियोजना की परियोजना कार्यान्वयन एजेंसी है, सीबीओ को एकजुट करने के साथ साथ आजीविका में वृद्धि करने के कार्यकलापों का सीधे वित्तपोषण कर रहा है। डब्ल्यूबीएसआरएलएम के माध्यम से कार्यान्वित कार्यकलापों की समग्र योजना इस प्रकार है:

  • 1 लाख रूपए की सीमा तक आजीविका सृजन कार्यकलापों को कार्यान्वित करने के लिए सामुदायिक निवेश निधि के भाग के रूप में सीड कैपिटल के माध्यम से महिला एसएचजी का वित्तपोषण।
  • पहली ग्रेडिंग के बाद सीधे प्रति एसएचजी 15,000 रूपए की चक्रीय निधि के माध्यम से वित्तीय सहायता प्रदान करना। चक्रीय निधि एसएचजी को बैंक ऋण/नगद ऋण प्राप्त करने में सहायता देगा।
  • समुदाय आधारित संस्था निर्माण से संबद्ध समुदायों का क्षमता वर्धन और कौशल वर्धन।

इस संदर्भ में डब्ल्यूबीएसआरएलएम के माध्यम से प्राप्त आईसीजेडएमपी निधियों को ‘संघ’के रूप में वर्णित सीबीओ को अपने सदस्य एसएचजी को ऋण प्रदान करने के लिए अंतरित किया जाता है। संघों ने 8049 महिला एसएचजी सदस्यों को कवर करने के लिए 2009 एसएचजी को समुदाय निवेश निधि का संवितरण किया है ताकि वे अपने संबंधित आजीविका संवृद्धि कार्यकलाप जैसे कि बीटेल वाइन उत्पादन, मुर्गीपालन, मछली पालन से संबद्ध कार्यकलाप आदि कर सकें। संघो ने अपने सदस्य एसएचजी को समुदाय निवेश निधि के रूप में 5.37 करोड़ रूपए का संवितरण किया है और उक्त कारपस आज की तिथि तक 16.56 करोड़ रूपए हो चुका है। 2912 परिवारों को कवर करने वाले 638 एसएचजी पर किया गया प्रतिदर्श अध्ययन दर्शाता है कि 4.55 करोड़ रूपए के समुदाय निवेश निधि का उपयोग करने के उपरांत 15.95 करोड़ रूपए की आय सृजित हुई।

एसएचजी सदस्यों की ऋण आवश्यकताओं को पूरा करने और पुन: बैंक ऋण प्राप्त करने के लिए उत्प्रेरक के तौर पर कारपस के रूप में 1334 एसएचजी के बैंक खातों में 1.97 करोड़ रूपए स्थानांतरित किए गए हैं।

समुदाय प्रबंधित स्थाई कृषि तकनीकी को विशेष रूप से कृषि क्षेत्र में आजीविका के बेहतर प्रबंधन के लिए लागू किया जा रहा है। सीएमएसए कृषि और एआरडी उत्पादन को प्रबंधित करने के लिए प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देता है। आर्गेनिक कृषि और जैव उर्वरकों के उत्पादन के लिए सीएमएसए के अंतर्गत विशेष जोर दिया गया था।

डब्ल्यूबीएसआरएलएम के माध्यम से आजीविका उपायों को अन्य सरकारी योजनाओं/विभागों यथा मनरेगा, कृषि विभाग (बीटल वाइन उत्पादन के लिए ग्रीन नेट पर आर्थिक सहायता प्रदान करता है) पशु संसाधन विभाग (विभिन्न स्टेकधारकों के क्षमता वर्धन के साथ पशुओं के टीकाकरण और रोगाड़ुरहित करने के लिए प्राणि मित्र की नियुक्ति) के साथ समंजित एवं अभिमुखी बनाने के साथ ही बैंको से नगद ऋण प्राप्त करने के लिए 2800 एसएचजी का बैंक से संपर्क स्थापित किया गया है।

इन प्रयासों के परिणाम को ऋण तक आसान पहुंच, सामूहिक प्रयास के माध्यम से गरीब परिवारों विशेषकर महिला समूहों का सशक्तिकरण, उत्पादक कार्यकलापों में अधिक भागीदारी के माध्यम से तटीय क्षेत्रों में गरीबी उन्मूलन के साथ जोखिम का विविधिकरण और प्राकृतिक संसाधनों के स्थाई उपयोग के प्रति अनुकूलन के रूप में सारबद्ध किया जा सकता है।

समुदाय आधारित वृक्षारोपण, जेएफएम और जैव विविधता संरक्षण कार्यकलाप:

पूर्वा मेदिनीपुर का तटीय अंचल आवधिक तुफान और ज्वार की लहरों, मौसमी उच्च वेग वाली हवाओं, तुफान और चक्रवातों तथा अपरदन के कारण जल भराव के लिए अधिक संवेदनशील है। इस परिदृश्य में सामुदायिक लचीलापन निर्मित करना तथा प्राकृतिक शक्तियों द्वारा निर्मित आपदाओं को कम करने के लिए आईसीजेडएम परियोजना को वन निदेशालय की भागीदारी में अनेक समुदाय आधारित उपाय करने के लिए कार्यान्वित किया गया जिसमें इसके आरंभ से हुई प्रगति का विवरण नीचे दिया गया है:

  • वृक्षारोपण कार्यकलाप: कृषिगत वन: 705 हेक्टेयर, मैनग्रोव:100 हेक्टेयर, स्ट्रिप वृक्षारोपण: 40 हेक्टेयर, गैप वृक्षारोपण: 390 हेक्टेयर, सीएसबी वृक्षारोपण: 100 हेक्टेयर, पालिसेड: 5500 मीटर, सेंट्रल नर्सरी:1
  • संयुक्त वन प्रबंधन कार्यकलाप: पैडी थ्रेसर-133, वैन रिक्शा-118, सिलाई मशीन- 167, पंप मशीन- 97, सबमर्सिबल पंप आधारित एकीकृत पेयजल और स्नान सुविधाएं- 10, पेयजल के लिए ट्यूबवेल- 14, तालाबों का निर्जलीकरण- 1, गांवों की कंक्रीट सड़कों का निर्माण- 300 मीटर, संबद्ध साजो-सामान सहित फिश इंसुलेटर बाक्स- 70, स्प्रे मशीन- 56, सोलर फिश ड्रायर- 11, बीटल वाइन फार्मिंग के लिए उर्बरक- 93लाभार्थी, पिगलिंग का वितरण- 18, फिशिंग- 105, डकलिंग- 575 (प्रति लाभार्थी 10), और चिकन- 1290 लाभार्थी (प्रति लाभार्थी 10)।
  • तटीय समुदायों के व्यापार विशिष्ट कौशल संवर्धन के लिए क्षमता वर्धन कार्यकलाप।

उपर्युक्त कार्यकलाप पूर्वा मेदिनीपुर अर्थात रामनगर-।, कोंटई ।, देशप्राण, खजुरी-।।, नंदीग्राम-। और महिशादल के तटीय ब्लाकों में 6.34 करोड़ रूपए की लागत से 20 वन संरक्षण समितियों (ईपीसी)/इको विकास समितियों (ईडीसी) के साथ सामुदायिक संविदा के माध्यम से वन निदेशालय द्वारा मार्गदर्शित किए गए थे।

मैनग्रोव और घेरेबंदी के कार्य से समुद्र के किनारे के क्षेत्रों और ज्वारीय क्षेत्रों में रेत के जमा हो जाने से तटीय अपरदन कम हुआ और समुद्र के किनारे स्थिर हुए। वृक्षारोपण भी तेज हवाएं जो कभी कभार जन-धन की हानि का कारण बनती हैं, के विरूद्ध कवच के रूप में कार्य करता है। वृक्षारोपण कार्य ने प्राकृतिक संसाधनों को पुन: भरने और इसके परिणामस्वरूप मरीन जंतु और वनस्पतियों के समृद्ध करने और इसमें वृद्धि करने के अलावा समुदायों को मजदूरी रोजगार प्रदान किया है।

मध्यक्षेप के क्षेत्र जहां लवण का जल में मिल जाना एक मुद्दा है जो समुदायों को व्यापक रूप से प्रभावित करता है, में पेयजल सुविधाओं में भी पर्याप्त मात्रा में वृद्धि हुई है।

विभिन्न कृषि और गैर-कृषि उपकरणों के प्रापण के माध्यम से वैकल्पिक आजीविका को बढावा दिया गया है। कृषि आधारित संसाधन उत्पादन में सुधार करने और सुक्ष्म स्तर पर आजीविका के गुजारा स्तर को स्थिर करने के लिए एफपीसी/ईडीसी के सदस्यों को उनके वास स्थान पोल्ट्री, डकरी, पिगरी कार्य उपलब्ध करवाया गया है।

तालाबों को समुदायों के स्वामित्व/पट्टे का शिथिलीकरण करके, फिशलिंग और फिश ड्रायर मशीनों को उपलब्ध करवाकर फिशरी आधारित कार्यकलापों को बढ़ावा दिया गया है। इपीसी/इडीसी के सदस्यों को समुदाय प्रबंधित फिश ड्रायर मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं जिससे अधिक स्वच्छता के साथ सुखाई गई मछलियां तैयार की जा रही हैं तथा बाजार में भेजी जा रही हैं और इससे बर्बादी कम हो रही है।

कृषि यंत्रों के प्रापण और वितरण ने कृषि यंत्रीकरण और श्रम सघनता के स्तर में सुधार किया है और इससे बचा समय घरेलू स्तर पर अन्य उत्पादक साधनों में लगाया जा रहा है।

जंतु बचाव केंद्र और पेट्रोलिंग कैंपों के सृजन के माध्यम से वृक्षारोपण की निगरानी के साथ साथ वन्य जीवों के बचाव और पुनर्वास कार्य में सुधार हुआ है।

इन मध्यक्षेपों के सहभागी दृष्टिकोण ने तटीय समुदाय के मूल आकांक्षा स्तर को स्पर्श किया है और इसे आईसीजेडएमपी का अभिन्न हिस्सा बनने के लिए तटीय समुदायों की बढ़ती जिज्ञासा में अच्छे से देखा जा सकता है।

माइलस्टोन