Inner Banner
होममाइलस्टोनतटीय समुदाय की आजीविका सुरक्षावेदारायणम नमक श्रमिक विकास परिषद

महिला नमक कामगारों का एक संघ

Vedaranyam Salt Workers
Vedaranyam Salt Workers
Vedaranyam Salt Workers
Vedaranyam Salt Workers
p>नमक निकालना नागापट्टीनम जिले के वेदारण्यम क्षेत्र का एक प्रमुख आर्थिक कार्यकलाप है। वेदारण्यम क्षेत्र में लगभग 10400 एकड़ से नमक का उत्पादन होता है जिसमें से 7000 एकड़ का प्रचालन दो बड़ी कंपनियों द्वारा भारत के नमक आयोग से भूमि को पट्टे पर लेकर किया जाता है जबकि शेष 3400 एकड़ भूमि का प्रचालन लगभग 700 छोटे पैमाने के उत्पादकों (जो 5 से 10 एकड़ भूमि धारित करते हैं) द्वारा पुन: नमक आयोग से पट्टे पर लेकर किया जाता है। लगभग 25 गांवो के 5000 के आस पास पुरूष और महिला स्थाई कामगार नमक उत्पादन प्रक्रिया में शामिल हैं। नमक उत्पादन एक मौसमी कार्य है और नमक कामगारों का दैनिक वेतन 100 रूपए से 150 रूपए प्रतिदिन के बीच है। अक्तूबर से जनवरी तक का समय नमक कामगारो के लिए मंदी का समय होता है और उनमें से अधिकांश नमक के खेत के मालिक और साहूकार से ऋण लेते हैं। साहूकार मनमाने ब्याज दरों पर ही ऋण प्रदान करते हैं। मंदी की अवधि के दौरान ऋण लेने के अलावा नमक कामगार शिक्षा, स्वास्थ्य, विवाह और त्यौहारों के लिए भी बड़ा ऋण लेते हैं। नमक कामगार केवल ब्याज अदा कर पाते हैं और मूल धन जस का तस बना रहता है और कभी कभार ब्याज भी संचित होकर मूल धन बन जाता है। एक ऋण चुकाने के लिए वे किसी और से दूसरा ऋण लेते हैं। ये सभी नमक कामगार को सदा के लिए कर्जदार बना देते हैं।

इस पृष्ठभूमि में और जैसा कि नमक कामगारों और उनके संगठनों द्वारा दिए गए सुझाव के अनुरूप यह निर्णय लिया गया कि नमक सत्याग्रह स्मारक के आस पास रहने वाले महिला नमक कामगारों की सहायता करने के लिए एक संघ बनाया जाए। इस प्रकार वेदारण्यम महिला नमक कामगार विकास परिषद का गठन किया गया। संघ के गठन का मुख्य उद्देश्य संघ को भविष्य में एक सामुदायिक बैंक के रूप में परिवर्तित करना है। इस संघ के उद्देश्य हैं- (i) नमक उत्पादन में लगे कामगारों का बोझ कम करना और उन्हे साहूकारों और अन्य ऋणदात्री एजेंसियों के चंगुल से मुक्त करना और (ii)मंदी के मौसम में महिला नमक कामगारों की आय में सुधार करना।

गांवों को चयनित करने का कार्य जून, 2013 में शुरू किया गयाऔर अगस्त, 2013 में पूर्ण किया गया। वेदारण्यम नगर निगम में 23 निवास स्थलों को चुना गया। 101 नमक कामगार समूहों (संयुक्त देयता समूह) का गठन किया गया जिसमें 707 महिलाओं को शामिल किया गया। इन समूहो को संघ का दर्जा दिया गया और इन्हे वेदारण्यम महिला नमक कामगार विकास परिषद का नाम दिया गया। इस संघ में 13 गांवों से 13 कार्यकारी समिति के सदस्य शामिल किए गए। कार्यालय के पदाधिकारी नामत: अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और एक खजांची का चयन इन 13 सदस्यों में से किया गया। इस परिषद में एमएसएसआरएफ का भी एक प्रतिनिधि शामिल किया गया है।

ऋण प्राप्त करने की प्रक्रिया

प्रत्येक जेएलपी महीने एक बार बैठक करती है। बैठक के दौरान ऋण के आवेदन प्राप्त और दर्ज किए जाते हैं। इन आवेदनों को कार्यकारी समिति को प्रस्तुत किए जाते हैं जो अपनी मासिक बैठक में ऋण देने के संबंध में निर्णय लेती है। ऋण प्रदान करने के लिए निम्नलिखित मानकों का प्रयोग किया जाता है: (i) ऋण की आवश्यकता,(ii) बैठकों में नियमित रूप से भाग लेना, और (iii) 100 रूपए प्रतिमाह की अपनी बचत का नियमित भुगतान करना। एमएसएसआरएफ का प्रतिनिधि निगरानी करता है तथा उचित रूप से लेखा, रजिस्टर और अन्य दस्तावेजों का अनुरक्षण करनेमें सहायता करता है। एमएसएसआरएफ यह निगरानी भी करता है कि समूहों द्वारा पुनर्भुगतान नियमित रूप से किया जाता है। परिषद की मासिक बैठक महीने के हर तीसरे सप्ताह में की जाती है जहां सामूहिक कार्यकलापों और सदस्यों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जाती है।

चक्रीय निधि का उपभोग

संघ के सदस्य चित्र 1 में दिए गए कार्यकलापों के लिए चक्रीय निधि का उपयोग कर सकते हैं। ऋण का अधिकांश भाग सूक्ष्म उद्यमियों/आय सृजन कार्यकलापों जैसे कि नमक उत्पादन, बकरी पालन, डेयरी, फूल की खेती, किराना की दुकान, टेलरिंग, प्रोविजन स्टोर आदि के लिए खर्च होता है। अन्य खर्चे जैसे कि बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवारिक खर्च को भी ऋण से पूरा किया जाता है। प्रत्येक सदस्य के लिए अधिकतम ऋण की सीमा 10,000 रूपए है और ब्याज की दर 12 प्रतिशत प्रतिवर्ष है जो अन्य सूक्ष्म वित्त संस्थाओ और बैंकों द्वारा प्रभारित ब्याज दर से कम है। परिषद ऋण के आकार का निर्धारण करती है और व्यक्ति को ऋण लेना होता है। महिला मुखिया वाले परिवार को ऋण प्राप्त करने में वरीयता दी जाती है। मार्च 2018 तक 34 समूहों के 238 सदस्यों ने ऋण प्राप्त किया है। 278,315 रूपए की धनराशि ब्याज के रूप में अर्जित की गई है। संघ के सदस्य अब लंबी अवधि के लिए सोसाइटी/समुदाय बैंक के रूप में पंजीकरण करने के लिए इच्छुक हैं।

Utilization of the revolving fund

सूक्ष्म उद्यमों के सफल मामले

बकरी पालन, मुर्गी पालन और डेयरी महिला नमक कामगारों द्वारा सफलता पूर्वक निष्पादित किए गए कुछ सूक्ष्म उद्यम हैं। कुछ महिलाओं के अनुभव लाभ और इस मध्यक्षेप का प्रभाव दिखाने के लिए प्रस्तुत किए जा रहे हैं

मेलका की रहने वाली सुश्री माहेश्वरी (30 वर्ष) यह बताती है कि अनेक महिलाओ के साथ उसके द्वारा शुरू किया गया बकरी पालन कार्य उनके जीवन मे सकारात्मक परिवर्तन लेकर आया। बकरी पालन का यह उसका पहला अनुभव था किंतु उसका पहला अनुभव सफल सिद्ध हुआ और वह अपने घरेलु खर्चों को पूरा करने में सफल रही। वह बाहरी स्रोतो से और नमक की खेती के मालिक से उधार लिए बिना प्रबंध करने में समर्थ थी। उसे गर्व है कि वह अपनी घरेलु आय में वृद्धि कर सकी। अन्य महिलाओं की तरह वह भी नमक के खेत में कार्य करती थी लेकिन उसने नमक की खेती में कार्य करना बंद कर दिया है क्योंकि वह बकरी पालन से पर्याप्त आय अर्जन में समर्थ है। आरंभ में उसने दो बकरियां पालीं किंतु आज उसके घर 10 बकरियां हैं। वह 12 महीनों में 5000 रूपए का पहला ऋण चुका पाई थी और उसने 10,000 रूपए का दूसरा ऋण लिया। उसे यह कहने में गर्व का अनुभव हो रहा है कि उसने ऋण को परिसंपत्ति में परिवर्तित किया। बकरी पालन के उसके अनुभव ने माहेश्वरी को दूसरे छोटे तरीकों से अन्य आय सृजन कार्यकलाप करने के लिए प्रोत्साहित किया। माहेश्वरी बताती हैं कि उसने अपने गांव तथा आसपास के इलाके मे साड़ी बेचने का साहस किया और इससे भी उसे तमाम घरेलु वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता मिली। आर्थिक सुधार के अलावा अब घरेलु कार्यक्षेत्र से बाहर अनेक चीजों का प्रबंध करने में उसे आत्म विश्वास है। वह एमएसएसआरएफ द्वारा प्रदत्त मानसिक सपोर्ट और तकनीकी निर्देशन को मानती है।

मेलका की 48 वर्षीया सुश्री तमिल मणि ने परिषद से 5500 रूपए का ऋण लेकर दो बकरियां खरीदीं। पहला ऋण चुकाने के बाद उन्होनें एक गाय (स्थानीय प्रजाति की) एक बछड़ा खरीदने के लिए 10,000 रूपए के ऋण की मांग की। उन्होनें 13,500 रूपए का भुगतान करके उन्हे खरीद लिया। शेष 3,500 रूपए को पूरा करने के लिए उन्होने अपनी बचत का उपयोग किया। उनको भरोसा है कि वह अब पशुओं की देखभाल भी कर सकती हैं।

मेलका की ही श्रीमती शांता ने मुर्गीपालन का व्यवसाय चुना और मुर्गीपालन से होने वाली आय से वह संतुष्ट हैं और वह नमक के खेत में भी कार्य करती हैं।

अनेक महिला नमक कामगार अपने बकरियों, मुर्गी, और पशुओं की देखभाल करने में समर्थ हैं और बिना किसी अतिरिक्त दबाव के अपने घरेलु कार्यो को भी करने मे समर्थ हैं तथा उन्होनें सूचित किया कि कुल मिलाकर साहूकारों पर उनकी निर्भरता में महत्वपूर्ण रूप से कमी आई है।

माइलस्टोन