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Livelihood Development
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दक्षिण के 24 परगना जिले के सागर ब्लाकमें सागर द्वीप और घोरामारा द्वीप शामिल हैं। सागर ब्लाक मृदा अपरदन, तटबंधों के टूटने और भूमि खंडों के समाप्त होने तथा समुद्र स्तर के बढ़ने की समस्या का सामना कर रहा है। सागर ब्लाक सुंदरवन कीलगभग समुची आजीविका विस्तार का प्रतिनिधित्व करता है और इस परिदृश्य में आईसीजेडएमपी के अंतर्गत सागर ब्लाक मे तटीय समुदायों के लिए आजीविका उपाय के प्रयास किए गए हैं। आजीविका विकास संघटक का मुख्य उद्देश्य तटीय जनसंख्या का कमजोर व हाशिए पर रहने वाले गरीबों की जीवन गुणवत्ता और आजीविका में सुधार करने के लिए समुदाय आधारित जलवायु से अपरिवर्तित रहने वाली आजीविका को बढ़ावा देने के साथ साथ तटीय और मरीन पारि-प्रणाली (इकोसिस्टम) को संरक्षित करना है।

सागर ब्लाक के निवासियों में लाभ से वंचित रहने वाले वर्गों के लिए आजीविका विकास कार्यक्रम का कार्यान्वयन एसपीएमयू और पश्चिम बंगाल राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा किया जा रहा है।

एसपीएमयू ने सूक्ष्म तटीय अवसंरचना के सृजन के लिए इंट्री प्वाइंट कार्यकलाप के भाग के रूप में एसएचजी के माध्यम से स्वयं ही 128 समुदाय संविदाएं कार्यान्वित की हैं। इंट्री प्वाइंट कार्यकलापों के माध्यम से पूर्ण किए गए प्रमुख कार्यों में ईंट से बनी 19 किमी. सड़क, 78 ट्यूब वेल की सिंकिंग, 4 कलवर्ट का निर्माण, एक शौचालय ब्लाक का निर्माण और 7 तालाबों की खुदाई करना शामिल है। यह उल्लेख करना उचित होगा कि इस प्रकार के विकास कार्य सामान्यतया संबंधित विभागों द्वारा कार्यान्वित किए जाते हैं। तथापि, आईसीजेडएमपी के मामले में प्रायोगिक प्रयास परामर्श प्रक्रिया के माध्यम से एसएचजी के मोबलाइजेशन के जरिए किए गए। परिसंपत्तियों का सृजन पीआरए टूल के परिनियोजन और सामुदायिक स्तर पर विभिन्न स्टैकधारकों के साथ गहन परामर्श करके किया गया।

इंट्री प्वाईंट कार्यकलाप का कार्यान्वयन करने से न केवल पेयजल सुविधाओं में वृद्धि हुई अपितु इससे द्वीप के मुख्य सड़को से संपर्क में भी सुधार हुआ। यह लेखांकन, प्राक्कलन, तैयारी, सामग्री का प्रापण, सामुदायिक संविदा और वित्तीय और वास्तविक दोनों संदर्भों में सृजित आस्तियों के आडिट के संदर्भ में तटीय समुदायों के बारे में ज्ञान बढ़ाने की एक कार्रवाई के रूप में भी साबित हुआ है। इंट्री प्वाईंट कार्यकलापों ने समुदाय आधारित एकता की प्रक्रिया को सरल बनाया है और सामुदायिक परिसंपत्तियों के स्वामित्व का भाव भी जागृत करता है। हस्तेक्षेप के प्रयासों ने यह सिद्ध किया है कि दूरदराज के खाड़ी क्षेत्रों संसाधनों का उपभोग करने के लिए वंचित स्थिति में होने के बावजूद यदि समुदायों को शिक्षित किया जाए तो भूमि, श्रम और अन्य संबद्ध सामग्री के संदर्भ में योगदान देकर परिसंपत्ति के सृजन में अपना योगदान दे सकते हैं।

डब्ल्यूबीएसआरएलएम जो इस परियोजना की परियोजना कार्यान्वयन एजेंसी है, सीबीओ को एकजुट करने के साथ साथ आजीविका में वृद्धि करने के कार्यकलापों का सीधे वित्तपोषण कर रहा है। डब्ल्यूबीएसआरएलएम के माध्यम से कार्यान्वित कार्यकलापों की समग्र योजना इस प्रकार है:

  • 1 लाख रूपए की सीमा तक आजीविका सृजन कार्यकलापों को कार्यान्वित करने के लिए सामुदायिक निवेश निधि के भाग के रूप में सीड कैपिटल के माध्यम से महिला एसएचजी का वित्तपोषण।
  • पहली ग्रेडिंग के बाद सीधे प्रति एसएचजी 15,000 रूपए की चक्रीय निधि के माध्यम से वित्तीय सहायता प्रदान करना। चक्रीय निधि एसएचजी को बैंक ऋण/नगद ऋण प्राप्त करने में सहायता देगा।
  • समुदाय आधारित संस्था निर्माण से संबद्ध समुदायों का क्षमता वर्धन और कौशल वर्धन।

इस संदर्भ में डब्ल्यूबीएसआरएलएम के माध्यम से प्राप्त आईसीजेडएमपी निधियों को ‘संघ’के रूप में वर्णित सीबीओ को अपने सदस्य एसएचजी को ऋण प्रदान करने के लिए अंतरित किया जाता है। संघों ने 8049 महिला एसएचजी सदस्यों को कवर करने के लिए 2009 एसएचजी को समुदाय निवेश निधि का संवितरण किया है ताकि वे अपने संबंधित आजीविका संवृद्धि कार्यकलाप जैसे कि बीटेल वाइन उत्पादन, मुर्गीपालन, मछली पालन से संबद्ध कार्यकलाप आदि कर सकें। संघो ने अपने सदस्य एसएचजी को समुदाय निवेश निधि के रूप में 5.37 करोड़ रूपए का संवितरण किया है और उक्त कारपस आज की तिथि तक 16.56 करोड़ रूपए हो चुका है। 2912 परिवारों को कवर करने वाले 638 एसएचजी पर किया गया प्रतिदर्श अध्ययन दर्शाता है कि 4.55 करोड़ रूपए के समुदाय निवेश निधि का उपयोग करने के उपरांत 15.95 करोड़ रूपए की आय सृजित हुई।

एसएचजी सदस्यों की ऋण आवश्यकताओं को पूरा करने और पुन: बैंक ऋण प्राप्त करने के लिए उत्प्रेरक के तौर पर कारपस के रूप में 1334 एसएचजी के बैंक खातों में 1.97 करोड़ रूपए स्थानांतरित किए गए हैं।

समुदाय प्रबंधित स्थाई कृषि तकनीकी को विशेष रूप से कृषि क्षेत्र में आजीविका के बेहतर प्रबंधन के लिए लागू किया जा रहा है। सीएमएसए कृषि और एआरडी उत्पादन को प्रबंधित करने के लिए प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देता है। आर्गेनिक कृषि और जैव उर्वरकों के उत्पादन के लिए सीएमएसए के अंतर्गत विशेष जोर दिया गया था।

डब्ल्यूबीएसआरएलएम के माध्यम से आजीविका उपायों को अन्य सरकारी योजनाओं/विभागों यथा मनरेगा, कृषि विभाग (बीटल वाइन उत्पादन के लिए ग्रीन नेट पर आर्थिक सहायता प्रदान करता है) पशु संसाधन विभाग (विभिन्न स्टेकधारकों के क्षमता वर्धन के साथ पशुओं के टीकाकरण और रोगाड़ुरहित करने के लिए प्राणि मित्र की नियुक्ति) के साथ समंजित एवं अभिमुखी बनाने के साथ ही बैंको से नगद ऋण प्राप्त करने के लिए 2800 एसएचजी का बैंक से संपर्क स्थापित किया गया है।

इन प्रयासों के परिणाम को ऋण तक आसान पहुंच, सामूहिक प्रयास के माध्यम से गरीब परिवारों विशेषकर महिला समूहों का सशक्तिकरण, उत्पादक कार्यकलापों में अधिक भागीदारी के माध्यम से तटीय क्षेत्रों में गरीबी उन्मूलन के साथ जोखिम का विविधिकरण और प्राकृतिक संसाधनों के स्थाई उपयोग के प्रति अनुकूलन के रूप में सारबद्ध किया जा सकता है।

समुदाय आधारित वृक्षारोपण, जेएफएम और जैव विविधता संरक्षण कार्यकलाप:

पूर्वा मेदिनीपुर का तटीय अंचल आवधिक तुफान और ज्वार की लहरों, मौसमी उच्च वेग वाली हवाओं, तुफान और चक्रवातों तथा अपरदन के कारण जल भराव के लिए अधिक संवेदनशील है। इस परिदृश्य में सामुदायिक लचीलापन निर्मित करना तथा प्राकृतिक शक्तियों द्वारा निर्मित आपदाओं को कम करने के लिए आईसीजेडएम परियोजना को वन निदेशालय की भागीदारी में अनेक समुदाय आधारित उपाय करने के लिए कार्यान्वित किया गया जिसमें इसके आरंभ से हुई प्रगति का विवरण नीचे दिया गया है:

  • वृक्षारोपण कार्यकलाप: कृषिगत वन: 705 हेक्टेयर, मैनग्रोव:100 हेक्टेयर, स्ट्रिप वृक्षारोपण: 40 हेक्टेयर, गैप वृक्षारोपण: 390 हेक्टेयर, सीएसबी वृक्षारोपण: 100 हेक्टेयर, पालिसेड: 5500 मीटर, सेंट्रल नर्सरी:1
  • संयुक्त वन प्रबंधन कार्यकलाप: पैडी थ्रेसर-133, वैन रिक्शा-118, सिलाई मशीन- 167, पंप मशीन- 97, सबमर्सिबल पंप आधारित एकीकृत पेयजल और स्नान सुविधाएं- 10, पेयजल के लिए ट्यूबवेल- 14, तालाबों का निर्जलीकरण- 1, गांवों की कंक्रीट सड़कों का निर्माण- 300 मीटर, संबद्ध साजो-सामान सहित फिश इंसुलेटर बाक्स- 70, स्प्रे मशीन- 56, सोलर फिश ड्रायर- 11, बीटल वाइन फार्मिंग के लिए उर्बरक- 93लाभार्थी, पिगलिंग का वितरण- 18, फिशिंग- 105, डकलिंग- 575 (प्रति लाभार्थी 10), और चिकन- 1290 लाभार्थी (प्रति लाभार्थी 10)।
  • तटीय समुदायों के व्यापार विशिष्ट कौशल संवर्धन के लिए क्षमता वर्धन कार्यकलाप।

उपर्युक्त कार्यकलाप पूर्वा मेदिनीपुर अर्थात रामनगर-।, कोंटई ।, देशप्राण, खजुरी-।।, नंदीग्राम-। और महिशादल के तटीय ब्लाकों में 6.34 करोड़ रूपए की लागत से 20 वन संरक्षण समितियों (ईपीसी)/इको विकास समितियों (ईडीसी) के साथ सामुदायिक संविदा के माध्यम से वन निदेशालय द्वारा मार्गदर्शित किए गए थे।

मैनग्रोव और घेरेबंदी के कार्य से समुद्र के किनारे के क्षेत्रों और ज्वारीय क्षेत्रों में रेत के जमा हो जाने से तटीय अपरदन कम हुआ और समुद्र के किनारे स्थिर हुए। वृक्षारोपण भी तेज हवाएं जो कभी कभार जन-धन की हानि का कारण बनती हैं, के विरूद्ध कवच के रूप में कार्य करता है। वृक्षारोपण कार्य ने प्राकृतिक संसाधनों को पुन: भरने और इसके परिणामस्वरूप मरीन जंतु और वनस्पतियों के समृद्ध करने और इसमें वृद्धि करने के अलावा समुदायों को मजदूरी रोजगार प्रदान किया है।

मध्यक्षेप के क्षेत्र जहां लवण का जल में मिल जाना एक मुद्दा है जो समुदायों को व्यापक रूप से प्रभावित करता है, में पेयजल सुविधाओं में भी पर्याप्त मात्रा में वृद्धि हुई है।

विभिन्न कृषि और गैर-कृषि उपकरणों के प्रापण के माध्यम से वैकल्पिक आजीविका को बढावा दिया गया है। कृषि आधारित संसाधन उत्पादन में सुधार करने और सुक्ष्म स्तर पर आजीविका के गुजारा स्तर को स्थिर करने के लिए एफपीसी/ईडीसी के सदस्यों को उनके वास स्थान पोल्ट्री, डकरी, पिगरी कार्य उपलब्ध करवाया गया है।

तालाबों को समुदायों के स्वामित्व/पट्टे का शिथिलीकरण करके, फिशलिंग और फिश ड्रायर मशीनों को उपलब्ध करवाकर फिशरी आधारित कार्यकलापों को बढ़ावा दिया गया है। इपीसी/इडीसी के सदस्यों को समुदाय प्रबंधित फिश ड्रायर मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं जिससे अधिक स्वच्छता के साथ सुखाई गई मछलियां तैयार की जा रही हैं तथा बाजार में भेजी जा रही हैं और इससे बर्बादी कम हो रही है।

कृषि यंत्रों के प्रापण और वितरण ने कृषि यंत्रीकरण और श्रम सघनता के स्तर में सुधार किया है और इससे बचा समय घरेलू स्तर पर अन्य उत्पादक साधनों में लगाया जा रहा है।

जंतु बचाव केंद्र और पेट्रोलिंग कैंपों के सृजन के माध्यम से वृक्षारोपण की निगरानी के साथ साथ वन्य जीवों के बचाव और पुनर्वास कार्य में सुधार हुआ है।

इन मध्यक्षेपों के सहभागी दृष्टिकोण ने तटीय समुदाय के मूल आकांक्षा स्तर को स्पर्श किया है और इसे आईसीजेडएमपी का अभिन्न हिस्सा बनने के लिए तटीय समुदायों की बढ़ती जिज्ञासा में अच्छे से देखा जा सकता है।

फूलों की खेती- वेदारण्यम में महिला नमक कामगारों के लिए आय का अतिरिक्त स्रोत

Floriculture
Floriculture

पृष्ठभूमि

वेदारण्यम भारत का एक प्रमुख नमक उत्पादक क्षेत्र है। नमक क्षेत्र के आस पास के गांवों में परिवार मुख्य रूप से नमक कामगार के रूप में कार्य करते हैं और इसके बाद फिशिंग और कृषि कार्य करते हैं। इन गांवों की अधिकांश महिलाएं नमक के खेतों में मजदूर के रूप मे कार्य करके अपनी आजीविका चलाती हैं। नमक के कम उत्पादन वाले समय के दौरान (अक्तूबर से जनवरी-उत्तरपूर्वी मानसून सीजन) नमक कामगार आमतौर पर अपनी वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अपने संबंधित नमक खेत के मालिक या साहूकार से धन अग्रिम लेते हैं। तथापि, अधिकांश महिला प्रमुख वाले परिवार को नमक खेत के मालिक द्वारा अग्रिम देने से मना कर दिया जाता है और वे अनिवार्य रूप से अधिक ब्याज दर पर साहूकार से धन उधार लेते हैं। इस परिदृश्य में आईसीजेडएम परियोजना की सहायता से आदिवासी कालोनी, कोविलन कोलाई और पूवंथोपू गांव की गरीब महिला नमक कामगारों ने नमक के कम उत्पादन वाले मौसम के दौरान अपना खर्चा पूरा करने के लिए आय सृजन कार्यकलाप के वैकल्पिक स्रोत के रूप में फूलों की खेती को अपनाया है।

प्रक्रिया

ग्राम विकास परिषद के सदस्यों के साथ लगातार बैठकें करके तथा महिला नमक कामगारों के साथ केंद्रित चर्चा ने आर्थिक उद्यम के रूप में फूलों की खेती शुरू करने के लिए रास्ता तैयार किया। इन बैठकों और चर्चाओं ने उन महिलाओं की पहचान करने में भी सहायता की जो वास्तव में फूलों की खेती करना चाहती थीं। महिला मुखिया वाले परिवारों और गरीब आर्थिक पृष्ठभूमि वाली महिलाओं को वरीयता दी गई। नमक की खेती मे कार्य करने के माध्यम से या अन्य आर्थिक कार्यकलाप के माध्यम से धनार्जन में अक्षम महिलाओं को भी शामिल किया गया। फूलों की खेती से संबधित कार्यकलाप करने के लिए संबंधित गांव की ग्राम विकास परिषद ने आदिवासी कालोनी की 23, कोविलान कोलाई गांव की 21 तथा पूवोंथोपू गांव की 30 महिलाओं का चयन किया।महिलाओं को अलग अलग कार्यालय पदाधिकारियों और रिकार्ड के साथ ‘फूल उगाने वाले समूह’ में बांटा गया। कार्यालय पदाधिकारियों में अध्यक्ष, सचिव और खजांची शामिल है जो अनिवार्य रूप से समूह के कार्यकलापों का प्रबंध करने, फूलों का विपणन करने, बैंक में धनराशि को जमा करने और मासिक आधार पर महलाओं को आय का वितरण करने का कार्य करते हैं। फूल उगाने वाले समूह ने आदिवासी कालोनी में 1.3 एकड़ भूमि , कोविलन कोलाई में 2 एकड़ भूमितथा पूवंथोप्पू में 3 एकड़ जमीन लंबी अवधि के पट्टे पर ली है।

फूल की खेती के लिए फूलों की प्रजातियों का चयन

फूल की खेती करने के लिए पट्टे पर ली गई जमीन की मिट्टी और पानी की जांच करने पर यह पता चला कि इलाका लवणीय है और सिंचाई के लिए पानी की भी किल्लत है। पुष्पविज्ञानियो से परामर्श करके सूखा और लवण प्रतिरोधी नीरियम और जेस्मीन को खेती के लिए चुना गया। इसके अलावा, इन फूलों को सांयकाल में कलियों के रूप में तोड़ कर प्रोसेसिंग के उपरांत बाजार में भेजा जा सकता है। नीरीयम पूरे वर्ष के दौरान फूल देता है जबकि जेस्मीन का अधिकतम उत्पादन गर्मी के दौरान होता है।

क्षमतावर्धन

महिला समूहों के लिए डिंडुगल और रामेश्वरम के लिए अनुभव दौरों का आयोजन किया गया क्योंकि वहां अनेक परिवार जैस्मीन की खेती में लगे हुए हैं। इन दौरों से फूल की फसल की खेती करने के बारे में ज्ञान प्राप्त हुआ और इससे महिलाएं को फूलों की खेती करने के लिए प्रेरणा भी मिली। प्रारंभ में महिलाओं के पास कृषि और फूलों की खेती का बहुत कम ज्ञान/कोई ज्ञान नही था। इन फूलों की खेती करने वाले किसानों से बात करके और खेतों का दौरा करके न केवल महिलाओं में विश्वास पैदा हुआ अपितु इससे उनको खेती करने के लिए प्रोत्साहन मिला। डिंडुगल के अनुभवी किसानों ने प्रारंभ में महिला नमक कामगारों के खेतों का नियमित दौरा किया और खेती करने तथा पैदावार के तौर-तरीकों के बारे में उनको निर्देशित व प्रशिक्षित किया। जब पैदावार के बारे में कम ज्ञान के कारण शुरूआती दिनों में फूलों की बर्बादी हुई तो डिंडुगल के किसानों ने पैदावार के सही तरीके के बारे में बताया और इसके बाद फसल की बर्बादी में महत्वपूर्ण कमी आई।

भूमि की तैयारी और पौधरोपण

भूमि की तैयारी मशीनो और फूलों की खेती में शामिल सदस्यों के श्रम से की गई। भूमि को तैयार करने, बाड़ लगाने, मेड़बंदी करने, पौधे लगाने और अन्य इनपुट की लागत का वहन परियोजना द्वारा किया गया जबकि खेती में भाग लेने वाली महिलाओं ने श्रम लागत का वहन किया। पानी का नुकसान कम करने तथा नमी को बनाए रखने तथा सूर्य के प्रकाश से जड़ो को बचाने के लिए भी नारियल की जटा तथा मज्जा का उपयोग किया गया। फूल उगाने वाले समूह ने डिंडुगल के निकट कोदई रोड से नीरीयम के तने की कटिंग और रामेश्वरम के किसानों से जैस्मीन के पौधे का प्रापण किया। तैयार भूमि को 12 फीट की दूरी देकर पंक्तियों में बांट दिया गया। आधी भूमि पर नीरीयम तथा आधी पर जैस्मीन के पौधे रोपे गए। आरंभिक अवधि में दो पंक्तियों के बीच उपलब्ध जगह में बैंगन, ग्वारफली और भिंडी की सब्जियां उगाई गईं। तथापि, अब यह बंद कर दिया गया है क्योंकि पौधे बड़े हो गए और इन्होनेंफूल देना शुरू कर दिया है। आदिवासी कालोनी और कोविलनकोलाई में सिंचाई की सुविधा बिजली के मोटर से देना शुरू किया गया है। महिला समूह पौधों में पानी देने की व्यवस्था करती हैं। महिला और उनके परिवार के सदस्य अपने अपने पौधरोपण के क्षेत्र में निराई-गुड़ाई करके, फसल को पानी देकर, उर्वरक डाल कर और अन्य फसल प्रबंधन तरीकों का उपयोग करके प्रबंध करते हैं।

पुष्प का उत्पादन और विपणन

केविलन कोलाई में फूल की उपज मई 2014 में तथा आदिवासी कालोनी में जून 2014 में प्राप्त होना शुरू हो गई थी। नीरीयम के फूलों की उपज पूरे वर्ष के दौरान दैनिक आधार पर प्राप्त होती है। आरंभ में फूलों को स्थानीय खुदरा व्यापारियों को बेचा गया और अब यह फूलों के थोक व्यापारी को बेचे जाते हैं क्योंकि आपूर्ति अधिक होती है।

लागत लाभ मूल्यांकन

नीरीयम और जैस्मीन फूलों की खेती की लागत और लाभ की गणना ए1 मेथड का उपयोग करके की गई (अर्थात सभी चुकाई गई लागत सहित)।आदिवासी कालोनी और कोविलन कोलाई में नीरीयम और जैस्मीन से अर्जित आय काफी प्रभावी थी जो 2014-15 के लिए प्रतिवर्ष प्रति एकड़ क्रमश: 1,26,048 रूपए तथा 1,02,231 रूपए थी। लाभ-अलाभ विश्लेषण से यह संकेत मिलता है कि आदिवासी कालोनी और कोविलनकोलाई ने क्रमश: 1.5 वर्ष और 2 वर्षों में अपने लाभ-अलाभ बिंदु (बीईपी अर्थात (राजस्व-विचलन लागत/लाभ) प्राप्त कर लिया है। यह विश्लेषण स्पष्ट संकेत देता है कि यह प्रयास एक सफल प्रयास था और इसका अनुकरण किए जाने की व्यापक संभावना है।

वेदारण्यम नमक कामगार विकास परिषद: महिला नमक कामगारों का एक संघ

Vedaranyam Salt Workers
Vedaranyam Salt Workers
Vedaranyam Salt Workers
Vedaranyam Salt Workers
p>नमक निकालना नागापट्टीनम जिले के वेदारण्यम क्षेत्र का एक प्रमुख आर्थिक कार्यकलाप है। वेदारण्यम क्षेत्र में लगभग 10400 एकड़ से नमक का उत्पादन होता है जिसमें से 7000 एकड़ का प्रचालन दो बड़ी कंपनियों द्वारा भारत के नमक आयोग से भूमि को पट्टे पर लेकर किया जाता है जबकि शेष 3400 एकड़ भूमि का प्रचालन लगभग 700 छोटे पैमाने के उत्पादकों (जो 5 से 10 एकड़ भूमि धारित करते हैं) द्वारा पुन: नमक आयोग से पट्टे पर लेकर किया जाता है। लगभग 25 गांवो के 5000 के आस पास पुरूष और महिला स्थाई कामगार नमक उत्पादन प्रक्रिया में शामिल हैं। नमक उत्पादन एक मौसमी कार्य है और नमक कामगारों का दैनिक वेतन 100 रूपए से 150 रूपए प्रतिदिन के बीच है। अक्तूबर से जनवरी तक का समय नमक कामगारो के लिए मंदी का समय होता है और उनमें से अधिकांश नमक के खेत के मालिक और साहूकार से ऋण लेते हैं। साहूकार मनमाने ब्याज दरों पर ही ऋण प्रदान करते हैं। मंदी की अवधि के दौरान ऋण लेने के अलावा नमक कामगार शिक्षा, स्वास्थ्य, विवाह और त्यौहारों के लिए भी बड़ा ऋण लेते हैं। नमक कामगार केवल ब्याज अदा कर पाते हैं और मूल धन जस का तस बना रहता है और कभी कभार ब्याज भी संचित होकर मूल धन बन जाता है। एक ऋण चुकाने के लिए वे किसी और से दूसरा ऋण लेते हैं। ये सभी नमक कामगार को सदा के लिए कर्जदार बना देते हैं।

इस पृष्ठभूमि में और जैसा कि नमक कामगारों और उनके संगठनों द्वारा दिए गए सुझाव के अनुरूप यह निर्णय लिया गया कि नमक सत्याग्रह स्मारक के आस पास रहने वाले महिला नमक कामगारों की सहायता करने के लिए एक संघ बनाया जाए। इस प्रकार वेदारण्यम महिला नमक कामगार विकास परिषद का गठन किया गया। संघ के गठन का मुख्य उद्देश्य संघ को भविष्य में एक सामुदायिक बैंक के रूप में परिवर्तित करना है। इस संघ के उद्देश्य हैं- (i) नमक उत्पादन में लगे कामगारों का बोझ कम करना और उन्हे साहूकारों और अन्य ऋणदात्री एजेंसियों के चंगुल से मुक्त करना और (ii)मंदी के मौसम में महिला नमक कामगारों की आय में सुधार करना।

गांवों को चयनित करने का कार्य जून, 2013 में शुरू किया गयाऔर अगस्त, 2013 में पूर्ण किया गया। वेदारण्यम नगर निगम में 23 निवास स्थलों को चुना गया। 101 नमक कामगार समूहों (संयुक्त देयता समूह) का गठन किया गया जिसमें 707 महिलाओं को शामिल किया गया। इन समूहो को संघ का दर्जा दिया गया और इन्हे वेदारण्यम महिला नमक कामगार विकास परिषद का नाम दिया गया। इस संघ में 13 गांवों से 13 कार्यकारी समिति के सदस्य शामिल किए गए। कार्यालय के पदाधिकारी नामत: अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और एक खजांची का चयन इन 13 सदस्यों में से किया गया। इस परिषद में एमएसएसआरएफ का भी एक प्रतिनिधि शामिल किया गया है।

ऋण प्राप्त करने की प्रक्रिया

प्रत्येक जेएलपी महीने एक बार बैठक करती है। बैठक के दौरान ऋण के आवेदन प्राप्त और दर्ज किए जाते हैं। इन आवेदनों को कार्यकारी समिति को प्रस्तुत किए जाते हैं जो अपनी मासिक बैठक में ऋण देने के संबंध में निर्णय लेती है। ऋण प्रदान करने के लिए निम्नलिखित मानकों का प्रयोग किया जाता है: (i) ऋण की आवश्यकता,(ii) बैठकों में नियमित रूप से भाग लेना, और (iii) 100 रूपए प्रतिमाह की अपनी बचत का नियमित भुगतान करना। एमएसएसआरएफ का प्रतिनिधि निगरानी करता है तथा उचित रूप से लेखा, रजिस्टर और अन्य दस्तावेजों का अनुरक्षण करनेमें सहायता करता है। एमएसएसआरएफ यह निगरानी भी करता है कि समूहों द्वारा पुनर्भुगतान नियमित रूप से किया जाता है। परिषद की मासिक बैठक महीने के हर तीसरे सप्ताह में की जाती है जहां सामूहिक कार्यकलापों और सदस्यों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जाती है।

चक्रीय निधि का उपभोग

संघ के सदस्य चित्र 1 में दिए गए कार्यकलापों के लिए चक्रीय निधि का उपयोग कर सकते हैं। ऋण का अधिकांश भाग सूक्ष्म उद्यमियों/आय सृजन कार्यकलापों जैसे कि नमक उत्पादन, बकरी पालन, डेयरी, फूल की खेती, किराना की दुकान, टेलरिंग, प्रोविजन स्टोर आदि के लिए खर्च होता है। अन्य खर्चे जैसे कि बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवारिक खर्च को भी ऋण से पूरा किया जाता है। प्रत्येक सदस्य के लिए अधिकतम ऋण की सीमा 10,000 रूपए है और ब्याज की दर 12 प्रतिशत प्रतिवर्ष है जो अन्य सूक्ष्म वित्त संस्थाओ और बैंकों द्वारा प्रभारित ब्याज दर से कम है। परिषद ऋण के आकार का निर्धारण करती है और व्यक्ति को ऋण लेना होता है। महिला मुखिया वाले परिवार को ऋण प्राप्त करने में वरीयता दी जाती है। मार्च 2018 तक 34 समूहों के 238 सदस्यों ने ऋण प्राप्त किया है। 278,315 रूपए की धनराशि ब्याज के रूप में अर्जित की गई है। संघ के सदस्य अब लंबी अवधि के लिए सोसाइटी/समुदाय बैंक के रूप में पंजीकरण करने के लिए इच्छुक हैं।

Utilization of the revolving fund

सूक्ष्म उद्यमों के सफल मामले

बकरी पालन, मुर्गी पालन और डेयरी महिला नमक कामगारों द्वारा सफलता पूर्वक निष्पादित किए गए कुछ सूक्ष्म उद्यम हैं। कुछ महिलाओं के अनुभव लाभ और इस मध्यक्षेप का प्रभाव दिखाने के लिए प्रस्तुत किए जा रहे हैं

मेलका की रहने वाली सुश्री माहेश्वरी (30 वर्ष) यह बताती है कि अनेक महिलाओ के साथ उसके द्वारा शुरू किया गया बकरी पालन कार्य उनके जीवन मे सकारात्मक परिवर्तन लेकर आया। बकरी पालन का यह उसका पहला अनुभव था किंतु उसका पहला अनुभव सफल सिद्ध हुआ और वह अपने घरेलु खर्चों को पूरा करने में सफल रही। वह बाहरी स्रोतो से और नमक की खेती के मालिक से उधार लिए बिना प्रबंध करने में समर्थ थी। उसे गर्व है कि वह अपनी घरेलु आय में वृद्धि कर सकी। अन्य महिलाओं की तरह वह भी नमक के खेत में कार्य करती थी लेकिन उसने नमक की खेती में कार्य करना बंद कर दिया है क्योंकि वह बकरी पालन से पर्याप्त आय अर्जन में समर्थ है। आरंभ में उसने दो बकरियां पालीं किंतु आज उसके घर 10 बकरियां हैं। वह 12 महीनों में 5000 रूपए का पहला ऋण चुका पाई थी और उसने 10,000 रूपए का दूसरा ऋण लिया। उसे यह कहने में गर्व का अनुभव हो रहा है कि उसने ऋण को परिसंपत्ति में परिवर्तित किया। बकरी पालन के उसके अनुभव ने माहेश्वरी को दूसरे छोटे तरीकों से अन्य आय सृजन कार्यकलाप करने के लिए प्रोत्साहित किया। माहेश्वरी बताती हैं कि उसने अपने गांव तथा आसपास के इलाके मे साड़ी बेचने का साहस किया और इससे भी उसे तमाम घरेलु वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता मिली। आर्थिक सुधार के अलावा अब घरेलु कार्यक्षेत्र से बाहर अनेक चीजों का प्रबंध करने में उसे आत्म विश्वास है। वह एमएसएसआरएफ द्वारा प्रदत्त मानसिक सपोर्ट और तकनीकी निर्देशन को मानती है।

मेलका की 48 वर्षीया सुश्री तमिल मणि ने परिषद से 5500 रूपए का ऋण लेकर दो बकरियां खरीदीं। पहला ऋण चुकाने के बाद उन्होनें एक गाय (स्थानीय प्रजाति की) एक बछड़ा खरीदने के लिए 10,000 रूपए के ऋण की मांग की। उन्होनें 13,500 रूपए का भुगतान करके उन्हे खरीद लिया। शेष 3,500 रूपए को पूरा करने के लिए उन्होने अपनी बचत का उपयोग किया। उनको भरोसा है कि वह अब पशुओं की देखभाल भी कर सकती हैं।

मेलका की ही श्रीमती शांता ने मुर्गीपालन का व्यवसाय चुना और मुर्गीपालन से होने वाली आय से वह संतुष्ट हैं और वह नमक के खेत में भी कार्य करती हैं।

अनेक महिला नमक कामगार अपने बकरियों, मुर्गी, और पशुओं की देखभाल करने में समर्थ हैं और बिना किसी अतिरिक्त दबाव के अपने घरेलु कार्यो को भी करने मे समर्थ हैं तथा उन्होनें सूचित किया कि कुल मिलाकर साहूकारों पर उनकी निर्भरता में महत्वपूर्ण रूप से कमी आई है।

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Fisher Friend Mobile Application

पृष्ठभूमि

भारत के तमिनाडु राज्य के नागापट्टीनम जिले के वेदारण्यम तट के मछली पकड़ने वाले समुदायों के लिए मोबाइल एप समुद्री सुरक्षा, कम आय, और मछलियों के समूह तक पहुंचने की समय सीमा से संबंधित मुद्दों का समाधान कर रहा है। फिशर फ्रेंड मोबाइल एप्लीकेशन को समुदाय के इच्छुक लाभार्थियों के लिए इस प्रौद्योगिकी की उपयोगिता और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए एक सहभागी फीडबैक दृष्टिकोण का प्रयोग करके पेश किया गया था।

मछली पकड़ने वाला समुदाय सर्वाधिक नाजुक समुदाय है जो अपने जीवन और आजीविका को जोखिम मे डालने वाली अनेक चुनौतियों जैसे कि अनिश्चित मौसम और समुदी स्थिति, समुद्र मेंखतरे के क्षेत्र, मछली के समूहों की मौजूदगी के बारे में जीपीएस सूचना का अभाव, फिश की प्रोसेसिंग में गुणवत्ता, मूल्य बर्धन और भंडारण का अभाव, बाजार की प्रवृति और सरकारी योजनाओं की कमी का सामना कर रहे हैं। इस परिप्रेक्ष्य में एम. एस. स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन ने 2007 में फिशर फ्रेंड मोबाइल एप्लीकेशन के बारे में विचार किया और इसे तैयार किया तथा बाद में इसे एन्ड्रॉयड मोबाइल प्लेटफार्म पर अपग्रेड किया। अब व्यापक पहुंच और लाभ के लिए इसे गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध करा दिया गया है। फिशर फ्रेंड मोबाइल एप्लीकेशन मछली पकड़ने वाले समुदाय को निम्नलिखित सूचनाएं प्रदान करता है:

  • संभावित फिशिंग जोन और टीयूएनए प्रजाति विशिष्ट पूर्वानुमान।
  • पीएफजेड और पारंपरिक फिशिंग रूटों/अंचलों तक सीधे नेविगेशन के लिए जीपीएस सुविधा।
  • लहरों की ऊंचाई, हवा की गतिऔर दिशा, समुद्री धारा और समुद्र की सतह का तापमान जैसे समुद्र की स्थिति का पूर्वानुमान।
  • तत्काल अलर्ट डिस्प्ले के माध्यम से साइक्लोन, सुनामीऔर ऊंची लहरों के संबंध में आपदा चेतावनी।
  • समुद्र में डुबी हुई नौकाओं, चट्टानी हिस्से, मृत कोरल रीफ जैसे खतरे के क्षेत्र।
  • विभिन्न मछलियों की प्रजातियों की बाजार मे कीमत।
  • श्री लंका के साथ अंतर्राष्ट्रीय सीमा रेखा (आईबीएल) के बारे में चेतावनी।
  • समुद्र में गंभीर स्थिति मे होने पर बचाव के लिए एसओएस (सेव आवर सोल) विकल्प।
  • आपातकालीन स्थिति में होने पर हार्बर की स्थिति का नेविगेशन।
  • सरकारी योजनाएं और दैनिक समाचार।
  • माई ट्रैकर (ट्रैकिंग फिशिंग रूट)।
  • महत्वपूर्ण संपर्क विवरण के साथ कॉल करने की सुविधा।

आईएनसीओआईएस समुद्र की स्थिति का पूर्वानुमान, संभावित फिशिंग जोनसूचना, शीघ्र चेतावनी आदि के संबंध में अपनी वैज्ञानिक सूचना प्रदान करता है। एमएसएसआरएफ ग्रामीण संसाधन केंद्र फिशरीज, बाजार की कीमत और आपातकालीन नंबर से संबंधित सरकारी सूचनाओं के साथ वैज्ञानिक डाटा का सरलीकरण करता है और सर्वर के डाटाबेस से लिंक वेबसाइट पर इसे अपलोड करता है। इस एप्लीकेशन का उपयोग करने वाले फिशरमैन को उल्लेखनीय लाभ हुआ जिसे वीआरसी और वीकेसी द्वारा किए गए आवधिक अनुवर्तन और आवश्यकता आधारित मूल्यांकन से प्रकाश में लाया गया। बड़ी मात्रा में प्रयोक्ताओं को एप्लीकेशन के माध्यम से सूचनाओं का निरंतर प्रवाह सुनिश्चित करने के लिए पीएफजेड और ओएसएफ सूचनाएं भारतीय राष्ट्रीय समुद्री सूचना सेवा केंद्र (आईएनसीओआईएस) से आटो पोर्ट की जाती हैं।

नागापट्टीनम जिले के वेदारण्यम क्षेत्र में एफएफएमए

नागापट्टीनम जिला 2004 के दौरान आई सुनामी में सर्वाधिक प्रभावित जिला था जिसमें लगभग 7000 जानें चली गई और लगभग 40,000 घर तबाह हो गए (एनआरसीआर, 2005)। अतएव, एफएफएमए की उत्पत्ति की सोच सुनामी के बाद के पुनर्वास कार्यकलापों के संदर्भ में विचार में आई। एप की विजिविलिटी में वृद्धि करने के लिए ग्राम स्तरीय बैठकों, एक एक से बातचीत, फिशर को एफएफएमए के दूत के रूप में बढ़ावा देकर, पब्लिक एड्रेस सिस्टम से उद्घोषणा करके और सोशल मीडिया अभियान सहित एफएफएमए दल द्वारा एक बहु-स्तरीय क्षमता वर्धन कार्यनीति शुरू की गई है। लगभग 8,223 मछली पकडने वाले लोगों को एफएफएमए और इसकी विशेषताओं के बारे मे प्रशिक्षित किया गया है; जिसके परिणामस्वरूप इस समय 5,593 मछली पकड़ने वाले लोग एफएफएमए एप का उपयोग करके फिशिंग संबंधी दैनिक शीघ्र चेतावनी और अन्य संगत सूचना प्राप्त कर रहे हैं।

मछली पकड़ने वाले लोगों द्वारा अर्जित लाभ

मछुआरों द्वारा प्राप्त शीर्ष सूचनाओं में ओएसएफ, जीपीएस, पीएफजेड, मौसम, हार्बर, पीएफजेड मैप और सरकारी योजनाओं की जानकारी शामिल है। 80 प्रतिशत से अधिक मछुआरे बेहतर निर्णय और मछली पकड़ने के लिए पीएफजेड सूचना का उपयोग करते हैं। छोटी नौका वाले मछुआरे पीएफजेड एडवाइजरी के कारण अपने पारंपरिक फिशिंग ग्राउंड से बाहर चले जाते हैं। एफएफएमए एप से सूचना प्राप्त करने वाले मछुआरे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों रूपों में लाभ प्रापत करते हैं। प्रत्यक्ष लाभ में मछली पकड़ने में और निवल आय में वृद्धि होती है। मछली के बढ़े हुए उत्पादन के कारण फिशिंग क्रू की मजदूरी में भी वृद्धि हुई है। कुछ मछुआरों ने नौका परिसंपत्तियों के प्रापण के लिए लिए गए ऋण को वापस करने के लिए अपने लाभ का उपयोग किया है। मछआरों यह भी बताया कि एडवाइजरी के कारण वे यह निर्धारित करने में समर्थ हैं कि फिशिंग ट्रिप पर जाने के लिए उन्हे कितने डीजल/बर्फ की आवश्यकता होगी।

एफएफएमए का उपयोग करने से फिशिंग इनपुट विशेषकर डीजल पर होने वाले खर्च पर्याप्त रूप से कम हो गया है। पीएफजेड, जीपीएस और माय ट्रैकर सुविधा का उपयोग करने का प्रमुख लाभ डीजल उपभोग में कमी और अपने फिशिंग स्थल तक समय से पहुंचने में सुविधा है। नाविकों ने बताया कि मछली के समूहों तक पहुंचना कम कठिन रह गया है और डीजल खर्च में कमी स्वयं एक प्रमुख आर्थिक लाभ है।

एफएफएमए की उपयोगिता के बारे में मछली पालक समुदाय की राय

सविंद्रन अब समुद्र में गायब नही होगा: मैं वेदारण्यम में अरकुट्टुथुराई गांव का 23 वर्षीय सविंद्रन हूं। मैं पारंपरिक मछुआरा हूं। मैं अपने पिता के साथ मछली पकड़ने जाया करता था और अब मैं अकेले समुद्र में जाने का साहस करता हूं। चूंकि ट्रॉलर नावें हमारे क्षेत्र में मछली पकडती हैं और वे हमारी जालों को काट देती हैं जिसके परिणामस्वरूप हमारा मछली पकड़ने का कार्य रूक जाता है। यहां तक कि तेज हवाओं के कारण हम समुद्र में अपनी दिशा भूल जाते थे। एफएफएमए के माध्यम से हमारे कार्य में ओएसएफ की शुरूआत होने से हम मौसम पूर्वानुमान के बारे में जानकर सुरक्षित और विश्वास से यात्रा करते हैं। पीएफजेड सूचना सटीकता और रूट नेविगेशन के कारण फिशिंग के अवसर, कुशलतामें वृद्धि हुई है और कम डीजल खर्च करके बड़ी मछलियों को पकड़ने में सहायता मिलती है। पीएफजेड एडवाइजरी के आधार पर दो अलग अलग अवसरों पर हमने 200 किग्रा. की समुद्री मछली और 500 किग्रा. की ट्यूना मछली जो 70,000 रूपए में बिकी, को पकड़ने में सफलता प्राप्त की। इस आर्थिक सुधार से हम अपनी आजीविका में सुधार करने के लिए नए जाल खरीदने का खर्च वहन कर सके। हमारे पूर्वज अपने मनोभावों, पानी के रंग और मौसमी भिन्नताओं के आधार पर मौसम का अनुमान लगाते थे किंतु अब हम अपने मोबाइल उपकरण के माध्यम से ओएसएफ के रूप में ऐसी सटीक सूचना प्राप्त करने में समर्थ रहते हैं।

महेश ने प्रौद्योगिकी का उपयोग करके लाभ अर्जित किया: मेरा नाम महेश है और मैं नागापट्टीनम जिले के वेदारण्यम तालुक मछुआरों के गांव, वेलापल्लम का निवासी हूं। मुझे एमएसएसआरएफ से संभावित फिशिंग क्षेत्र, मौसम तथा समुद्र के मौसम पूर्वानुमान की स्थिति के बारे में सूचना प्राप्त होती रहती है। उदाहरण के लिए उच्च वायु गति के बारे में सूचना हमें गाइड करती है कि हम समुद्र में न जाकर घर पर रहें और जाल तैयार करने का कार्य करें। कुछ अवसरों पर हम हवा की असामान्य गति और लहरों की ऊंचाई के बारे में अनुमान के बारे में समुद्र की स्थिति के पूर्वानुमान की विश्वसनीयता का सत्यापन करने के लिए साक्ष्य हेतु समुद्री किनारे पर जाते हैं। हम अनुमान की सटीकता के साक्षी रहे हैं और हमने समय पर अपने एंकर बोट और महंगे जालों को सुरक्षित स्थानों पर रख दिया था और इस प्रकार उनको खोने और क्षतिग्रस्त होने से बचाया है। इस प्रकार एफएफएमए के निर्णय लेने की सपोर्ट प्रणाली ने लाखों रूपए की हमारी संपत्ति को सुरक्षित रखने में सहायता की है।

सूचना ने हमारे फिशिंग के अवसरों, कुशलता को बढ़ाने में सहायता देने के साथ ही तीन अवसरों पर बड़ी मछलियों को पकड़ने में सहायता की है। 13 दिसंबर, 2016 को शाम 6 बजे मुझे पीएफजेड एडवाइजरी प्राप्त हुई जिसमें वेदारण्यम तटीय क्षेत्र में जीपीएस समन्वय का संकेत प्राप्त हुआ। मैं एडवाइजरी के आधार पर समुद्र में उतरा और 15 पागम पर समुद्री मछली, कैरांगिड और ट्यूना के बड़ी बड़ी मछलियो को पकड़ा। इस मछली पकड़ने के कार्य से सामान्य बिक्री मूल्य से 20,000 रूपए अधिक का लाभ प्राप्त हुआ। अत: यह समझा जा सकता है कि समुद्र में उतरने से पहले हम उचित और व्यवहार्य निर्णय लेने के लिए पीएफजेड, ओएसएफ और मौसम पूर्वानुमान की सूचना के लिए एफएफएमए का अवलोकन करते हैं। एमएसएसआरएफ द्वारा दिया गया जीपीएस प्रशिक्षण बहुत उपयोगी रहा है; इस प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान और कौशल से मैं अपने जीपीएस का उपयोग करता हूं और कुशलता से और सुरक्षित यात्रा करता हूं।

श्री मुरूगन, नागोरीपट्टीनाचेरी: मैं नागापट्टीनम जिले में मछुआरों के नागोरीपट्टीनाचेरी गांव से हूं। 18 नवंबर, 2016 को लगभग 3 बजे सुबह को मैं और तीन और लोग तट से 35 किमी. दूर मछली पकड़ने के लिए समुद्र के अंदर गए। अचानक इंजन खराब हो गया और हम समुद्र के बीच में फंस गए। हम चिंतित थे क्योंकि आसपास कोई नही था और अन्य मछुआरों को अपने स्थान के बारे में सूचित करने के लिए आसपास कोई लैंडमार्क नहीं था। तथापि, मेरे एक साथी मछुआरे ने बोट की लोकेशन को पिन करने के लिए एफएफएमए जीपीएस सुविधा के बारे मे बताया। इस एप का उपयोग करके मैं अपने मित्रों को अपनी लोकेशन के बारे में सूचित कर सका और वे आकर हमें बचा कर ले गए।

माइलस्टोन