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जियो टेक्स्टाइल ट्यूब तटबंध के संस्थापन के माध्यम से तटीय अपरदन नियंत्रण

Coastal Erosion Control
Coastal Erosion Control

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा ‘ओडिशा में तटरेखा परिवर्तन’विषय पर किए गए अध्ययन से पता चलता है कि ओडिशा में मोटे तौर पर तटरेखा में 46.8 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है और 14.4 प्रतिशत तटरेखा स्थिर है तथा 2.00 प्रतिशत तटरेखा कृत्रिम है। अपरदन (अधिक, मध्यम और कम) तटरेखा के 36.8 प्रतिशत भाग में हो रहा है, केवल 8.2 प्रतिशत भाग में अधिक अपरदन होता है। इस अपरदन का प्रमुख कारण राज्य के तटवर्ती जिलों में नियमित रूप से तुफान और बाढ़ की आवृति है।

धमारा-पारादीप विस्तार के साथ केंद्रपाडा जिले का पेंथा (200–32’ -5”N) 860– 5”E) एक कृषि गांव है। यह क्षेत्र विभिन्न नदियों यथा ब्राह्मणी, बैतरणी, चिंचीरी, पाठशाला, मैपुरा, खरासरोता, वरूणेई और धमारा से जुड़ा हुआ है। इसकी सामान्य भौगोलिक स्थिति अनियमित है और यह अनेक अपवाहिकाओं, नदियों, तालाबों, झीलों, दलदले स्थानों, खाड़ियों और लगूनों से भरा हुआ है। यह तट आलिव राइडली कछुओं द्वारा इधर-उधर निर्मित घोसलों के लिए जाना जाता है। यह समुद्र तट एक मिट्टी के तटबंध द्वारा विभाजित है जिसकी ऊंचाई लगभग 3 मीटर तथा लंबाई 1.5 किमी. है। इसमें से लगभग 400 मीटर लंबा क्षेत्र समुद्री जल से भर जाने के लिए अधिक संवेदनशील है और इसके कारण इस तट पर अपरदन की संभावना अधिक होती है। पेंथा गांव से सटा हुआ तटवर्ती क्षेत्र पिछले कुछ वर्षों से लगातार अपरदन का शिकार होता रहा है। इस स्थान से लगे समुद्री किनारे पर पूरे वर्ष भर तेज लहरें टक्कर मारती रहती हैं। समुद्री सतह का ढाल तीब्र है। पेंथा की तटीय किनारा गांव की ओर शिफ्ट हो रहा है।

  • 1960 में तटरेखा मौजूदा पुराने तटबंध से 4000 मीटर दूर थी।
  • 2001 में तटरेखा मौजूदा पुराने तटबंध से 500 मीटर दूर थी।
  • 2005 में तटरेखा मौजूदा पुराने तटबंध से 200 मीटर दूर थी।
  • 2006 में तटरेखा मौजूदा पुराने तटबंध से 50 मीटर दूर थी।
  • 2008 में तटरेखा मौजूदा पुराने तटबंध से 20 मीटर दूर थी।
  • 2009 में तटरेखा मौजूदा पुराने तटबंध से 5 मीटर दूर थी।
  • 2009-10 में जर्जर हो चुके तटबंध को पुराने तटबंध के पिछले हिस्से से 60 मीटर दूर निर्मित किया गया।
  • समुद्री लहरों ने पुराने मौजूदा तटबंध को 2009-10 के दौरान क्षतिग्रस्त कर दिया था और 2011 में लकड़ी के स्टंप की पाइलिंग और रेजिन पीवीसी सैंडबैग डंपिंग का उपयोग करके सुरक्षा के पारंपरिक तरीके का प्रयोग किया गया।
  • 2011-12 में तटरेखा पुराने तटबंध को पार करके 400 मीटर आगे तक चली आई और 350 मीटर तटबंध को बहा दिया।

असुरक्षित अपरदन से पैंथा गांव को सुरक्षित करने के लिए एकीकृत तटीय अंचल प्रबंधन – राज्य परियोजना प्रबंधन यूनिट और जल संसाधन मंत्रालय, ओडिशा सरकार ने विश्व बैंक की सहायता से साफ्ट इंजिनियरिंग का नवीनतम तरीका जिसमें जियो टेक्स्टाइल तटबंध की व्यवस्था करना शामिल है, अपनाया गया है। यह ओडिशा राज्य में एक प्रायोगिक परियोजना है जिसमें मौजूदा राजनगर-गोपालपुर लवणीय तटबंध की दीर्घावधिक सुरक्षा के लिए इस तटबंध पर खतरा उत्पन्न करने वाली लहरों को रोकने के लिए एक संरचनात्मक प्रणाली विकसित की जाएगी। इस प्रायोगिक परियोजना की सफलता समुद्र तट के अन्य असुरक्षित क्षेत्रों में समान मामलों के एक मॉडल के रूप में मानी जाएगी जो तटीय अपरदन को रोकने और भूमि, संपदा और जीवन को सुरक्षित करनेके लिए एक लंबा रास्ता तय करेगी। इसके अलावा, यह प्राकृतिक आपदाओं के समय तटों की रक्षा करेगी।

संस्थापन अवधि के दौरान किए गए विभिन्न कार्यकलाप और संघटक नीचे दिए गए हैं:

  • जियो टेक्स्टाइल ट्यूब तटबंध के संस्थापन के लिए स्थल का सर्वेक्षण करने, डिजाइन तैयार करने और तकनीकी दिशानिर्देश प्रदान करने के साथ साथ कार्य के गुणवत्ता नियंत्रण और निगरानी के लिए परियोजना परामर्शदाता के रूप में आईआईटी, मद्रास के सामुद्रिक इंजीनियरिंग विभाग की सेवाएं शुरू की गई हैं। परामर्शदाता ने स्थल का चयन किया और फील्ड जांच और मॉडलिंग अध्ययन के माध्यम से डिजाइन तैयार की है।
  • जियो ट्यूब तटबंध के निर्माण का कार्य मैसर्स गरवारे वाल रोप्स प्राइवेट लिमिटेड, पुणे को सौंपा गया है।
  • तटरेखा के 505 मीटर लंबे क्षेत्र को मौजूदा मिट्टी के तटबंध के साथ एकीकृत करके जियो ट्यूब से सुरक्षित किया गया है। इस तटबंध में रेत के गारे से भरी 235 जियो ट्यूब संस्थापित की गई है जिसे ग्रेनाइट गैबियन की रक्षात्मक परत से कवर किया गया है।

हस्तक्षेप के लाभ/प्रभाव

  • जियो ट्यूब के सामने रेत जमाव देखा गया।
  • स्थल पर पर्यटकों के दौरों की संख्या में वृद्धि हुई।
  • पेंथा के तटवर्ती गांवों को सुरक्षित कर लिया गया और साइक्लोन के कारण अब ये तटवर्ती बाढ़ से कम असुरक्षित हैं।
  • पेंथा और अन्य समीपवर्ती गांवों का जीवन और संपत्ति का समुद्री ज्वार और लहरों से बचाव हुआ है।
  • स्थानीय समुदायों की कृषि योग्य भूमि का लवणीय जल से बचाव हुआ है जिससे उनकी आय में वृद्धि हुई है।
  • स्थानीय ग्रामवासियों ने अपने जीवन और संपत्ति की सुरक्षा के प्रति भरोसा अर्जित किया है क्योंकि उन्होनें (i) पक्के मकानों का निर्माण शुरू किया है (ii) अपने झोपड़ियों की मरम्म्त करना शुरू किया है, और (iii)जीवन जोखिम और असुरक्षा के कारण विगत में गांव छोड़ने वाले लोगों का पेंथा में पुन: बसना शुरू कर दिया है।
  • गंभीर साइक्लोन हुद हुद (12 अक्तूबर, 2014) के दौरान गैबियन द्वारा रक्षित किए गए पुराने तटबंध का समुद्री किनारे की ढलान बिल्कुल भी प्रभावित नही हुई और जियो ट्यूब के सामने रेत का ढेर लग गया।

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