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होममाइलस्टोनतटीय संसाधनों का संरक्षण और संरक्षणउष्णकटिबंधीय सूखी सदाबहार वनों का संरक्षण

सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से उष्णकटिबंधीय शुष्क सदाबहार वनों का संरक्षण

Conservation of tropical dry
Conservation of tropical dry

वेदारण्यम में तटवर्ती क्षेत्र धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विविधता के अलावा जैव विविधता में भी समृद्ध है और यहां जानवरों और पक्षियों की अनेक विशिष्ट प्रजातियां पाई जाती हैं। इस क्षेत्र में मैनग्रोव, लगून, ज्वारीय कीचड़ युक्त भूमि, दलदल और उष्णकटिबंधीय शुष्क सदाबहार वन मौजूद हैं। वेदारण्यम के निकट द प्वाइंट कलीमरी वन्यजीव अभ्यारण घास के मैदानों, कीचडदार भूमि, बैकवाटर, बालुकूट और उष्णकटिबंधीय शुष्क सदाबहार वनों का मिश्रण है।उष्णकटिबंधीय शुष्क सदाबहार वन एक विशिष्ट वन हैं जो केवल तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में पाया जाता है। इनका वितरण उत्तर में आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम से दक्षिण में तमिलनाडु के रामनाथपुरम तक पतली तटीय पटृी में सीमित है। इस क्षेत्र की असमान जलवायु परिस्थिति जहां वर्षा गर्मी और शीत दोनों मानसून के दौरान होती है और शुष्क मौसम मार्च से सितंबर तक चलता है, इस पतली पट्टी में उष्णकटिबंधीय शुष्क सदाबहार वनों के विकास और मौजूदगी के अनुकूल है। टीडीईएफ में पेड़ों, झाड़ियों, लताओं और औषधियुक्त पौधों का एक मिश्रित संयोजन है जो अपरिवर्तित स्थिति में एक क्षेत्र का निर्माण करता है और कीड़ों, उभयचर प्राणियों, सरीसृपों और स्तनपायी जंतुओं सहित जंतुओं की विविध श्रेणियों के लिए आवास स्थल उपलब्ध करवाता है। तथापि, अपरिवर्तित स्थिति में इस प्रकार के वन बमुश्किल बचे हुए हैं और इनमें से अधिकांश विकृत कंटीली झाड़ियों से थोड़ी ही अच्छी स्थिति में है जिनमें बुनियादी वानस्पतिक उत्तमता का अभाव है। टीडीईएफ को वर्तमान समय में द प्वाइंट कलीमरी वन्यजीव अभ्यारण और तटवर्ती अटूट वनों में संरक्षित किया गया है।वेदारण्यम में आईसीजेडएम परियोजना में पंचायती राज संस्थाओं और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी से गांव की 66 एकड़ पंचायती जमीन पर टीडीईएफ को स्थापित करने का एक प्रयास किया गया है।

नमक सत्याग्रह स्मारक स्थल

वेदारण्यम नमक सत्याग्रह स्मारक स्थल के आस-पास लगभग 30 एकड़ भूमि पर टीडीईएफ संस्थापित किया गया है। इस क्षेत्र की निर्धारित भूमि में से कुछ क्षेत्र थोड़ा उपर उठा हुआ है जो द प्वाइंट कलीमरी वन्यजीव अभ्यारण में प्राकृतिक टीडीईएफ की पर्यावरणीय व्यवस्था के समान है किंतु ये क्षेत्र प्रोसोपिस जुलीफ्लोरा से भरा हुआ है। इन क्षेत्रों में प्रोसोपिस पेड़ों को पलमिरा और अन्य टीडीईएफ पौधों को नुकसान पहुंचाए बिना जड़ से उखाड़ लिया जाता है। नमक सत्याग्रह स्मारक स्थल के आस पास कुछ अन्य क्षेत्रों में भूमि अपेक्षाकृत नीची है और 2004 की सुनामी के दौरान समुद्री जल से भर गया था और इस प्रकार यह भूमि थोड़ी लवणीय हो गई थी। इन क्षेत्रो में मानसून के दौरान वर्षा का पानी एकत्र करने और मानसून के बाद इस पानी को बहा देने के बाद नमक आंशिक रूप से प्राप्त होता है। ऐसा कई मानसून के दौरान किया गया और इसके बाद बाहर से गैर लवणीय मिट्टी ले आने के कारण सुनामी प्रभावित इलाके में छोटे छोटे टीले निर्मित हो गए और इन टीलों पर टीडीईएफ वृक्षो को लगाया गया। चूंकि मिट्टी रेतीली थी और इसमें पोषक तत्वों की कमी थी अत: पौधरोपण से पहले इसे पोषक तत्वों से परिपूर्ण किया गया। 3x3x3 आकार के गड्ढे खोदे गए इनमें 1:1:1 के अनुपात में गोबर, लाल मिट्टी और रेत से भरा गया। इससे नमी को बनाए रखने मे सहायता मिली और और नमक का दबाव कम हुआ। 54 प्रजातियों के 2,116 पौधे (80 सेमी. लंबे) 3 मीटर की दूरी पर लगाए गए। पानी देने के लिए पौधों के चारो ओर कम गहरी नालियां बनाई गईं। गर्मी मे प्रत्येक पौधे के आस पास गीली घास लगाई गई। पौधों को पानी देने के लिए वर्षा जल का संचयन करने के लिए पास ही में दो वर्षा जल संभरण तालाब खोदे गए। गर्मी के दौरान नियमित रूप से पानी दिया गया, कटाई-छंटाई की गई तथा नियमित देखभाल की गई। स्थानीय प्रजातियों तथा इसके जंगल विज्ञान की प्रथाओं की पहचान करने में स्थानीय समुदायों के ज्ञान ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। पौधरोपण का प्रबंधन एक संयुक्त समिति द्वारा किया जा रहा है जिसमें सहभागी गांवों नामत: पूवोन्थोपू, काडीनालवायल, कोवीलानकोलाई, कोविलथावु और आदिवासी कालोनी के ग्राम विकास परिषद के सदस्य शामिल हैं।

Salt Sathyagraha

काडीनालवायल

8 एकड़ भूमि का कुल क्षेत्र स्थानीय देवी देवताओं (वेमपादाई अइयानार पिडारी अम्मा) के मंदिरों और कब्रिस्तान से संबंधित है और गांव के तालाब (वेटुकुलम) के आस पास स्थित भूमि को काडीनालवायल पंचायती राज संस्था द्वारा टीडीईएफ वृक्षारोपण के लिए प्रदान किया गया। इन भूखंडों को सावधानी पूर्वक तैयार करके इनके चारो ओर बाड़ लगाई गई तथा इमारती लकड़ी, फलदार और टीडीईएफ प्रजातियों के लगभग 1,066 पौधे लगाए गए। इस वृक्षारोपण की देखभाल अब काडीनालवायल ग्राम पंचायत द्वारा की जा रही है।

टीडीईएफ वृक्षों से तटवर्ती कुंजों का पुनर्नवीकरण

वेदारण्यम के आस पास स्थित तटवर्ती अटूट झुरमुट टीडीईएफ जीव जंतुओ और वनस्पतियों के भंडारगृह तथा तटवर्ती क्षेत्र के स्थानीय प्रजातियों के लिए घर के रूप में कार्य करते हैं। इन अटूट तटवर्ती झुरमुटों में 65 से अधिक जंगली प्रजातियों की पहचान की गई है तथा इनमें से लगभग 60 प्रतिशत सदाबहार हैं। इसके अलावा अटूट झुरमुटों में औषधिय पौधों की मात्रा बहुतायत मे पाई जाती है। कुडालोर तटीय क्षेत्र में झुरमुटों का अध्ययन 80 से अधिक औषधिय पौधों के होने का संकेत देता है। तथापि इन अटूट झुरमुटों में से अधिकांश कृषि के विस्तार, प्राकृतिक संसाधनों के दोहन, प्रबंधन के पारंपरिक तरीकों के समाप्त होने आदि के कारण नष्ट होने के विभिन्न स्तरों पर हैं। इस परियोजना में टीडीईएफ वृक्षारोपण के लिए ऐसे तीन अटूट झुरमुटों का चयन किया गया है।

पेरियाकुठागई आयनर सेक्रेड ग्रोव

वेदारण्यम के निकट पेरियाकुठागई गांव में लगभग 8 किमी. क्षेत्र में उष्णकटिबंधीय शुष्क सदाबहार वनों के साथ सेक्रेड ग्रोव विद्यमान है। इस सेक्रेड ग्रोव में निम्न प्रजातियों के पूर्ण विकसित वृक्ष मौजूद हैं:

  • अटलांटिया मोनोफाइला,
  • गार्सिनिया स्पिकाटा
  • स्ट्रेब्लस एस्पर
  • मेनिलकारा हैक्जेंड्रा
  • मेमेसाइलोनम बेलेटम

परियोजना कार्यकलापों के भाग के रूप में इस सेक्रेड को मंदिर समिति की भागीदारी से संरक्षित किया जा रहा है। पूरे सेक्रेड को अनधिकृत कब्जे से बचाने के लिए बाड़ से घेरा गया है और वनरोपण में उत्पन्न अंतर को भरने के उपाय के रूप में निम्न पौधों को लगाया जा रहा है: अटलांटिया मोनोफाइला के 20 पौधे, गार्सिनिया स्पिकाटा के 25 पौधे, स्ट्रेब्लस एस्पर के 6 पौधे, कोलोफाइलम इनोफाइलम के 35 पौधे और मेसाइलोनम बेलेटम के 65 पौधे लगाए जा रहे हैं। इस पौधरोपण का उत्तर जीवन 76 प्रतिशत है।

आयाकर्नापुलम कालीतीर्थ आयनार सेक्रेड ग्रोव

इस सेक्रेड ग्रोव का आकार लगभग 10 किमी. है और यह आयाकर्नापुलम गांव में स्थित है। लेपिसेंथिस टेट्राफाइला, मधुका लेगिफोलिया, साइजिजियमजंबोलेनम और स्ट्रेब्लस एस्पर के वृक्ष इस सक्रेड ग्रोव में बहुतायत में पाये जाते हैं। देवी कालीतीर्थ तमिलनाडु के साथ साथ दक्षिण एशियाई देशों में रहने वाले तमिल लोगों में बहुत प्रचलित हैं। इसलिए इस मंदिर मे श्रद्धालुओं की संख्या बहुत अधिक होती है और इसी कारण से विभिन्न विकास कार्यो के कारण से सेक्रेड ग्रोव धीरे धीरे कब्जाए जा रहे हैं। सेक्रेड ग्रोव को और विकृत होने से बचाने के लिए परियोजना में पारंपरिक मंदिर समिति के साथ कार्य किया जा रहा है और पूरे क्षेत्र को बाड़ से घेर दिया गया है तथा पौधों में पानी देने के लिए कम गहरे बोर वेल तथा ओवरहेड पानी की टंकी की व्यवस्था की गई है।

थेनादार आयनर सेक्रेड ग्रोव

यह थेनादार नामक गांव में स्थित है और सेक्रेड का क्षेत्र 5 एकड़ में फैला हुआ है। यह पूरी तरह से नष्ट हो चुका है और जब टीडीईएफ वृक्षारोपण के साथ इसके पुनर्नवीकरण कार्यकलाप शुरू किए गए तो यह क्षेत्र पूरी तरह से खाली था। इस सेक्रेड ग्रोव में निम्नलिखित 13 टीडीईएफ प्रजातियों के लगभग 240 पौधे लगाए गए हैं:

  • अटलांटिया मोनोफाइला- 25
  • गार्सिनिया स्पिकाटा – 30
  • मेनिलकारा हैक्जेंड्रा – 35
  • पेलिरोस्टिया अपोजिट – 20
  • सरगाडा अंगुस्टिफोलिया – 25
  • डाइरस इबेनंप्स – 20
  • ड्राईपेट्स स्पाइरा – 15
  • सेपिंडस मार्गीनेटस – 20
  • मिमोसूप इलेंगी- 15
  • कैथियम साइप्राक्स – 5
  • ग्लाइकोमिस मारीसस – 20
  • मुरिया पेनिकुलाटा – 5 और
  • लैपिसाथस टेट्राफाइला – 5 (240)

जैसा कि अन्य सेक्रेड ग्रोव के मामले मे है, वृक्षारोपण से पहले पूरे क्षेत्र को बाड़ से घेरा गया और इसका रखरखाव मंदिर समिति द्वारा किया जा रहा है।

संधानदेवकाडु स्कूल

संधानदेवकाडु गांव में एक प्राथमिक विद्यालय के आस पास लगभग 2 एकड़ भूमि में टीडीईएफ वृक्षारोपण कार्य किया गया। अनेक फलदार वृक्षों और इमारती लकड़ी के वृक्षों के साथ साथ टीडीईएफ की कुल 8 प्रजातियों के पौधे लगाए गए। इस वृक्षारोपण का प्रबंधन संधानदेवकाडु स्कूल इको विकास समिति द्वारा किया जा रहा है जिसमें पंचायती राज संस्थाओं और जिला स्कूल प्राधिकरण तथा एमएसएसआरएफ के प्रतिनिधि शामिल हैं।

निष्पादन मूल्यांकन – सामाजिक आडिट

उष्णकटिबंधीय शुष्क सदाबहार वनों के पुनर्नवीकरण वृक्षारोपण के निष्पादन का मूल्यांकन एक सामाजिक आडिट दल द्वारा किया गया था जिसमें तमिलनाडु वन विभाग (रेंज अधिकारी) तथा बागवानी विभाग के प्रतिनिधि, एक स्कूल शिक्षक, समुदाय के सदस्य और एमएसएसआरएफ का कर्मचारी शामिल था। इस दल ने सभी स्थलों का दौरा किया और स्टेकधारकों के साथ वृक्षारोपण का प्रबंध करने वाली समितियों से बातचीत की। इस दल ने उत्तर जीवन प्रतिशत, चयनित प्रजातियों, रखरखाव और सुरक्षा के मानकों के आधार पर निष्पादन को बढ़िया के रूप में रेटिंग प्रदान की। पौधों का उत्तर जीवन प्रतिशत 82 से 95 के बीच था।

मॉडल का अनुकरण

  • पन्नल नामक गांव के पंचायती राज संस्था ने एमएसएसआरएफ के तकनीकी निर्देशन में पंचायत की 8 एकड़ भूमि पर टीडीईएफ वृक्षारोपण का अनुकरण करके वृक्षारोपण किया। यह क्षेत्र लवणीय भूमि के निकट स्थित था और इसलिए यह लवणीय था। यह पूरी तरह से जंगली प्रासोपिस जुलिफोरा से भरा हुआ था। भूमि की तैयारी के भाग के रूप में सभी प्रासोपिस जुलिफोरा को जड़ से उखाड़ा गया तथा भूमि को जोता गया जिससे कि सभी नमक के हिस्से मिट्टी में गहराई में दब गए। वर्षा जल के संभरण के लिए बीच मे एक तालाब (0.5 एकड़) का खोदा गया। पूरे क्षेत्र को पूरी तरह से बाड़ से घेर दिया गया।
  • मिमुसोप इलेंगी, मिलिंगटोनिया हार्टेसिया, हिविसकस टिलिसस, कैसिया फिस्टुला, साइजिजियम जंबोलेनम, टर्मिनालिया केटप्पा, थेसपिसिया पोपुलेना, एजडिराचा इंडिका और पांगेमिया पिनाटा के पौधे लगाए गए। प्रासोपिस को निकालने, भूमि की तैयारी करने, बाड़ लगाने, वृक्षारोपण करने, तालाब की खुदाई करने, नियमित सिंचाई करने तथा निगरानी करने के लिए नरेगा योजना का उपयोग किया गया। प्रासोपिस को बेचने से प्राप्त धन का भी उपयोग किया गया। पौधों की आपूर्ति तमिलनाडु वन विभाग द्वारा की गई।
  • मुथुपेट में रहमत मैट्रिकुलेशन बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय ने एमएसएसआरएफ के तकनीकी निर्देशन में इस माडल की नकल 12 एकड़ भूमि में की है।

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