परियोजना के लाभ

परियोजना की प्रमुख उपलब्धियां

  • पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तकनीकी अंग के रूप में साइकाम की स्थापना और प्रचालन।
  • अन्ना विश्वविद्यालय, चेन्नै में एक विश्व स्तरीय संस्थान- राष्ट्रीय स्थाई तटीय प्रबंधन केंद्र (एनसीएससीएम) की स्थापना और प्रचालन। यह संस्थान समुद्री तटों की बेहतर सुरक्षा, संरक्षण, पुनर्वास, प्रबंधन, और नीति निर्माण के लिए सहायता प्रदान करता है। 14 अभिचिन्हित तटवर्ती शोध संस्थानों के साथ कार्य करते हुए यह भारत में तटीय और मरीन क्षेत्रों के एकीकृत और स्थाई प्रबंधन के बारे में अनुसंधान और विकास कार्यकलापों में लगा हुआ है और आईसीजेडएमपी से संबंधित नीतिगत और वैज्ञानिक मामलों पर केंद्र और राज्य/संघ राज्य क्षेत्रों तथा अन्य संबद्ध स्टेकधारकों को सलाह देता है।
  • भारतीय तटीय क्षेत्रों के प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण अपनी तरह का अनुठा (विश्व बैंक परियोजनाओं में सबसे बड़ा) व्यापक तटीय एरियल फोटोग्राफी कार्य पूर्ण किया गया।
  • समूचे समुद्र तट का अवसाद सेल मैपिंग और ईएसए मैपिंग कार्य पूर्ण किया गया।
  • समूचे समुद्र तट का समुद्री किनारे का परिवर्तन मैप कार्य पूर्ण किया गया।
  • सामुदायिक भागीदारी से गुजरात राज्य में 16500 हेक्टेयर मैनग्रोव पौधरोपण कार्य पूर्ण किया गया।
  • जामनगर, गुजरात में 70 एमएलडी एसटीपी कार्य कर रहे हैं और शहर की लगभग 5 लाख जनसंख्या को फायदा हुआ है।
  • ओडिशा के पैंथा गांव में ग्रामीणों के जीवन और संपदा की रक्षा करने के लिए तटीय अपरदन रोकने के लिए जियो ट्यूब का सफल संस्थापन किया गया है।
  • ओडिशा और पश्चिम बंगाल में 39 बहुउद्देश्यीय साइक्लोन शेल्टर तैयार किए जा चुके हैं और इसका उपयोग किए जाने के लिए इनको साइक्लोन शेल्टर प्रबंधन और अनुरक्षण समिति को सौंप दिया गया है जो प्राकृतिक आपदाओं के समय जीवन और पशुधन की हानि से ग्रामीणों का बचाव करेंगे तथा सामान्य दिनों में इनका वैकल्पिक उपयोग सामुदायिक भवन, आंगनवाडी, एसएचजी प्रशिक्षण केंद्र, स्कूल आदि के रूप में किया जा रहा है।
  • पारादीप-ओडिशा में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन संस्थापित करने का कार्य चल रहा है।
  • पश्चिम बंगाल के सागर में 100 प्रतिशत विद्युतीकरण कार्य पूर्ण हो चुका है। सागर द्वीप समूह के समूचे क्षेत्र में विद्युत वितरण लाइनों का कार्य पूर्ण होने से (लगभग 35000 परिवारों को कवर करते हुए) न केवल तटवर्ती समुदायों (लगभग 25000 लोग) के जीवन में सुधार हुआ है अपितु डीजल जेनरेटर सेट बंद करने सेद्वीप समूह में सीएचजी उत्सर्जन में भी महत्वपूर्ण कमी आई है।
  • पश्चिम बंगाल के दीघा में समुद्री तटों के सुंदरीकरण और फेरीवालों के पुनर्वास कार्यकलापों को पूर्ण कर लिया गया है।
  • 20-25 वर्षों तक के लिए अभिचिन्हित तटीय क्षेत्रों हेतु वैज्ञानिक डाटा आधारित और बहु-स्टेकधारक प्रबंधन कार्यनीति अपनाने के लिए गुजरात, ओडिशा और पश्चिम बंगाल राज्यों हेतु प्रायोगिक तौर पर आईसीजेडएम योजना तैयार की गई है।
  • तीनों प्रायोगिक राज्यों- गुजरात, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में चयनित तटीय क्षेत्रों में एसएचजी, तटीय समुदायों, सीबीओ के माध्यम से वैकल्पिक आजीविका कार्यकलाप किए जा रहे हैं।
  • सीओपी 22 के दौरान आईसीजेडएमपी का राष्ट्रीय रूप से निर्धारित योगदान प्रतिबद्धता में महत्वपूर्ण कार्यनीति के रूप में विशेष उल्लेख किया गया है।